संजीव कुमार से हुई सगाई पर एक शर्त ने बिखेरा रिश्ता, एक्टिंग छोड़ साध्वी बनीं नीता मेहता, अब देती हैं प्रवचन
70-80 के दशक की मशहूर actress नीता मेहता का सफर सिनेमा से साध्वी बनने तक का एक अनोखा journey है। उन्होंने न सिर्फ बॉलीवुड में कई hit films दीं, बल्कि एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने ग्लैमर को छोड़ spiritual life का रास्ता चुना। उनका नाम अब स्वामी नित्यानंद गिरी है, और वह spiritual discourses देती हैं। लेकिन उनके जीवन की सबसे दर्द भरी कहानी है — संजीव कुमार के साथ टूटा relationship ।
नीता की मां डॉक्टर और पिता वकील थे, इसलिए वे चाहते थे कि उनकी बेटी भी किसी respected profession में जाए। मगर नीता के मन में फिल्में चल रही थीं। उन्होंने परिवार के opposition के बावजूद एफटीआईआई से एक्टिंग की शिक्षा ली और मुंबई आ गईं। उनकी पहली फिल्म 'पोंगा पंडित' (1975) थी, जिसमें रणधीर कपूर उनके साथ थे। बाद में उन्होंने 'ईंट का जवाब पत्थर', 'मैं तुलसी तेरे आंगन की', 'रिश्ता कागज का' जैसी popular movies कीं।
उनके करियर के उसी दौर में संजीव कुमार के साथ काम करते हुए love हो गया। दोनों की सगाई भी हो गई थी। लेकिन फिर आई एक condition — संजीव कुमार ने चाहा कि नीता एक्टिंग छोड़ दें। यह वही एक्टिंग थी जिसके लिए नीता ने परिवार के खिलाफ जाना था। इसलिए वह इस demand को पूरा नहीं कर पाईं। रिश्ता टूट गया, और नीता ने जीवन भर शादी नहीं की।
संजीव कुमार के साथ टूटे रिश्ते के बाद नीता ने अपना jewelry business शुरू किया, जो काफी successful रहा। लेकिन 1996 के बाद उन्हें संसार के सुखों में अचानक detachment हो गया। गुरु मां आनंदमयी के प्रभाव में आकर उन्होंने साध्वी बनने का decision किया। नाम बदलकर स्वामी नित्यानंद गिरी रख लिया। आज वह अपने यूट्यूब चैनल पर ज्ञान की बातें साझा करती हैं।
नीता मेहता की कहानी सिर्फ एक एक्ट्रेस का करियर नहीं, बल्कि एक तलाश की कहानी है — पहले fame , फिर निराशा, और अंत में शांति। उनका जीवन कई लोगों के लिए एक inspiration बन गया है। बॉलीवुड की चमक-दमक को छोड़ आध्यात्म की ओर बढ़ना आसान नहीं होता, लेकिन नीता ने यह choice किया।
एक्टिंग छोड़ने की शर्त तो बहुत harsh कठोर थी। क्या वाकई प्यार करने वाला इतना controlling नियंत्रण चाहता है?
नीता मेहता की तरह कई लड़कियां अपने सपनों के लिए परिवार के pressure दबाव में आती हैं। लेकिन उन्होंने दोनों लड़ाइयां लड़ीं।
ये बात सुनकर दिल टूट गया। संजीव कुमार तो बहुत simple सादे लगते थे, मगर रिश्ते में इतनी condition शर्त?
उनके प्रवचन सुनने लायक हैं। जीवन के experience अनुभव से भरे होते हैं।
जब तक वह फिल्मों में थीं, तब तक बहुत कम लोगों को पता था। अब साध्वी बनकर भी public figure सार्वजनिक व्यक्ति बन गई हैं।
क्या आज की हीरोइनें भी ऐसा कर पाएंगी? ग्लैमर छोड़ spiritual life आध्यात्मिक जीवन चुनना?