पाताल से भी गहरा है 2 घंटे 11 मिनट की इस फिल्म का सस्पेंस, दृश्यम लगेगी फीकी
अगर आप ओटीटी पर एक ऐसी फिल्म ढूंढ रहे हैं जो आपको सस्पेंस और नैतिक दुविधा में डाल दे, तो वध 2 आपके लिए है। यह महज दो घंटे ग्यारह मिनट की फिल्म नहीं, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक यात्रा है जो आपको पाताल से भी गहरे सवालों के गर्त में खींच लेती है। जहां अधिकांश थ्रिलर सिर्फ plot twist पर नाचते हैं, वहीं वध 2 एक आम इंसान के भीतर छिपे हत्यारे की खोज पर केंद्रित है।
फिल्म में संजय मिश्रा एक ऐसे पुलिस अधिकारी का किरदार निभाते हैं जो नौकरी के बाद सब्जियां भी बेचता है। यह भूमिका उनकी performance को और गहराई देती है। वहीं, नीना गुप्ता एक महिला के रूप में छाई हुई हैं जो दो हत्याएं कर चुकी है। दोनों कलाकारों के बीच तनाव भरी tension भरी बातचीत फिल्म की रीढ़ है।
फिल्म ने नेटफ्लिक्स पर आते ही तहलका मचा दिया। दर्शक इसकी storytelling की तारीफ कर रहे हैं। कई लोग कह रहे हैं कि इतनी गहराई में उतरने वाली फिल्म देखकर दृश्यम भी फीकी लगने लगती है। यहां डर किसी खूनी चाकू से नहीं, बल्कि moral conflict से आता है।
वध 2 सिर्फ एक murder mystery नहीं, बल्कि एक ऐसी कहानी है जो सवाल करती है कि इंसान किन परिस्थितियों में हद पार कर जाता है। फिल्म का pace धीमा है, लेकिन यही इसकी ताकत भी है। यह आपको जल्दी नहीं, बल्कि गहराई से impact डालती है।
संजय मिश्रा ने तो फिल्म की backbone रीढ़ ही संभाल ली। एक छोटे से police officer पुलिस अधिकारी की थकान, गुस्सा और जिम्मेदारी सब उनकी आंखों में थी।
नीना गुप्ता के किरदार ने मन पर long-lasting impression गहरा प्रभाव छोड़ा। क्या वह नायिका है या खलनायिका? यह confusion भ्रम फिल्म को और रोचक बनाता है।
मैंने इतनी देर तक फिल्म के बारे में सोचा कि अगले दिन ऑफिस में focus फोकस नहीं हुआ। क्या story कहानी है भई!
अगर आपको slow burn धीमी लेकिन तीव्र फिल्में पसंद हैं, तो यह एकदम must-watch जरूर देखें।
क्या इंसान को बदलने वाली circumstances परिस्थितियां उसके crime अपराध को बर्दाश्त करने लायक बना देती हैं? फिल्म ने यह question सवाल खड़ा कर दिया।
कोई jump scare अचानक का डर नहीं, कोई रक्तरंजित दृश्य नहीं, फिर भी फिल्म ने grip पकड़ बनाए रखी। यही तो असली art कला है।