दासुन शनाका को PSL छोड़कर IPL में खेलना पड़ा भारी, पाकिस्तान सुपर लीग ने दी कड़ी सजा
पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) ने श्रीलंकाई कप्तान the player ने अनुबंध का उल्लंघन करने के आरोप में दासुन शनाका पर एक साल का ban लगा दिया है। यह कार्रवाई उस समय हुई जब शनाका ने 21 मार्च को PSL से नाम वापस लेकर इंडियन प्रीमियर लीग में राजस्थान रॉयल्स के साथ जुड़ने का फैसला किया। इस फैसले ने न केवल लाहौर कलंदर्स की टीम रणनीति को बिखेर दिया, बल्कि लीग के अनुबंधित ढांचे पर भी सवाल खड़े कर दिए।
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने कहा कि खिलाड़ी द्वारा टूर्नामेंट छोड़ना the agreement का सीधा उल्लंघन है। एक आधिकारिक समीक्षा में स्पष्ट किया गया कि शनाका के द्वारा दिया गया कारण — निजी प्रतिबद्धता — मौजूदा अनुबंध के दायरे में मान्य नहीं था। हालांकि शनाका ने regret जताया और पाकिस्तानी प्रशंसकों से माफी मांगी, PCB ने लीग की integrity बनाए रखने के लिए कार्रवाई को जरूरी बताया।
श्रीलंकाई टीम के पूर्व कप्तान ने कहा, "मैं PSL से नाम वापस लेने के अपने decision पर गहरा खेद महसूस करता हूं। लाहौर कलंदर्स के प्रशंसकों के प्रति मेरा respect हमेशा रहा है।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उस समय उनका किसी अन्य लीग में खेलने का इरादा नहीं था, लेकिन आईपीएल ने उन्हें सैम करन के स्थान पर तुरंत अवसर दे दिया।
इस प्रतिबंध का impact सिर्फ शनाका तक ही सीमित नहीं है। यह अन्य अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के लिए भी एक warning है कि PSL जैसी लीग के साथ किए गए commitments को हल्के में नहीं लिया जाएगा। पिछले साल जिम्बाब्वे के ब्लेसिंग मुजरबानी पर दो साल का प्रतिबंध लग चुका है, जो दिखाता है कि PCB strict action के माध्यम से लीग की प्रतिष्ठा बनाए रखने का प्रयास कर रहा है।
आईपीएल के बढ़ते influence के कारण, कई खिलाड़ियों के लिए PSL जैसी लीगों के साथ अनुबंध रखना अब एक risk बन गया है। शनाका का मामला दिखाता है कि आईपीएल के आकर्षण के बावजूद, अन्य लीगें भी authority के साथ अपने नियमों को लागू कर सकती हैं। अब सवाल यह है कि क्या भविष्य में अधिक खिलाड़ी ऐसे conflict में फंसेंगे या लीगों के बीच समन्वय बेहतर होगा।
एक साल का बैन बहुत भारी है, लेकिन अगर लीग को serious गंभीरता से लेना है तो ऐसी कार्रवाई जरूरी थी।
लाहौर कलंदर्स ने उन्हें 75 लाख में खरीदा था और फिर वो हमें betray विश्वासघात कर गए। बैन कम है।
उन्होंने माफी मांग ली, क्या इसके बावजूद उन पर punishment सजा लगाना जरूरी था?
आईपीएल के आगे PSL जैसी लीगों की value कीमत कम होती जा रही है।
अनुबंध है तो उसे तोड़ने पर consequence परिणाम भुगतने पड़ेंगे ही। बोर्ड सही कर रहा है।
मुजरबानी पर 2 साल, शनाका पर 1 साल — क्या the penalty दंड देश के आधार पर अलग है?
हम प्रशंसक निराश हैं। ऐसे फैसले trust विश्वास खत्म करते हैं।