तेज धूप में नंगे पैर वृंदावन की गलियों में घूमते दिखे विराट-अनुष्का, नहीं लिया वीआईपी व्यवहार, दिखे संस्कार
अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर विराट कोहली और अनुष्का शर्मा फिर से spiritual retreat की ओर लौट आए। वृंदावन की तप्त गलियों में नंगे पैर चलते हुए दिखाई दिए दोनों, जहां उन्होंने प्रेमानंद महाराज के प्रवचनों में deep devotion के साथ भाग लिया। इस बार भी उन्होंने किसी विशेष VIP treatment की अपेक्षा नहीं की, बल्कि आम भक्तों की तरह बैठकर ज्ञान सुना।
सोशल मीडिया पर उनके वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसमें वे राधिका वाटिका में महाराज के blessings लेने जाते दिख रहे हैं। एक दृश्य में अनुष्का एक संत के पैर छूकर respect प्रकट करती हैं, और विराट उस क्षण में स्पष्ट तृप्ति अनुभव करते दिखते हैं। इस छोटे से आचरण ने उनके cultural values के प्रति लोगों का आकर्षण और बढ़ा दिया है।
यूजर्स इसे एक genuine connection के रूप में देख रहे हैं — न कि मीडिया के लिए एक नाटकीय प्रदर्शन। कई लोगों ने कमेंट किया कि भक्ति तब सच्ची होती है जब अहंकार और luxury छोड़ दिए जाएं। विराट के आईपीएल 2026 के तनाव से दूर आध्यात्म में डूबे रहने को भी कई तरह से positive influence के तौर पर देखा जा रहा है।
इस यात्रा में दोनों ने पारंपरिक पोशाक पहनी — गले में तुलसी की माला, माथे पर तिलक। वे प्रेमानंद महाराज से जुड़े आश्रम में भी दिखे, जहां उनका उष्ण welcome किया गया। यह आश्रम उनके लिए एक आत्मीय sanctuary बन गया है, जहां वे न केवल आराम करते हैं, बल्कि अपने अंदर की inner peace को भी पुनः प्राप्त करते हैं।
इस साल के अंदर यह उनकी तीसरी यात्रा थी। इससे साफ होता है कि आध्यात्म उनके जीवन का एक consistent practice बन चुका है। खेल के तनाव और सार्वजनिक जीवन के दबाव के बीच यह उनके लिए एक mental reset का साधन भी है। ऐसे क्षण न केवल उनकी छवि को गहराई देते हैं, बल्कि उनके प्रशंसकों के लिए भी inspiration का स्रोत बनते हैं।
ऐसे simple gestures सादगी भरे इशारे दिखाते हैं कि असली संस्कार पैसे से नहीं आते।
हर कोई बस फिटनेस की बात करता है, लेकिन विराट का ये mental balance मानसिक संतुलन उनकी असली ताकत है।
क्या असल में आजकल कोई और स्टार ऐसे नंगे पैर चलेगा? ये न केवल भक्ति है, बल्कि humility विनम्रता का भी प्रदर्शन है।
प्रेमानंद महाराज के आश्रम तक पहुंचने के लिए गर्मी में लंबा रास्ता तय करना खुद एक धैर्य की परीक्षा है।
अनुष्का के उस संत के पैर छूने का दृश्य कई लोगों को भावुक कर गया। ये छोटी-सी विश्वास की क्रिया बहुत कुछ कह जाती है।
क्या वाकई में वीआईपी लोगों को भी ऐसे ही दर्शन के लिए आना चाहिए? equality समानता का ये संदेश तो साफ है।