होर्मुज की नाकेबंदी से पहले कच्चे तेल में तेजी, ट्रंप के बयानों ने बढ़ाया बाजार का दबाव

होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी की आहट के बीच, crude oil की दुनिया में अफरातफरी मच गई है। अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता talks के विफल होने के बाद, अमेरिकी नौसेना ने इस रणनीतिक जलमार्ग को blockade करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसका मतलब यह है कि ईरान अपना तेल निर्यात नहीं कर पाएगा — जो दुनिया भर के oil market पर तुरंत असर डाल रहा है।

इस तनाव के बीच, prices में तेजी आ गई है। शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड 8 फीसदी की बढ़त के साथ 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि अमेरिकी बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई में 8.61 फीसदी की surge आई। अब ब्रेंट 101.6 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई 104.2 डॉलर पर पहुंच गया है। यह स्तर पिछले सत्र की गिरावट के बाद एक तेज reversal है।

ईरान रोजाना लगभग 2 मिलियन बैरल तेल निर्यात करता था। इस आपूर्ति के halt से दुनिया भर में तेल की आपूर्ति और भी tight हो जाएगी। जानकारों का कहना है कि बाजार अब उसी स्थिति में पहुंच गया है जो ceasefire से पहले थी — लेकिन अब अमेरिका सीधे ईरान की निर्यात क्षमता पर निशाना साध रहा है।

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बाजार को और confuse कर दिया। उनका कहना है कि निकट भविष्य में तेल और गैस की कीमतों में या तो drop आएगी या फिर rise । यह बयान उन मिडटर्म चुनावों से पहले आया है जो नवंबर में होने वाले हैं। बाजार अब एक policy decision और भू-राजनीतिक जोखिम के बीच झूल रहा है।

टिप्पणियाँ 6

  • तेलकुंभ

    अगर नाकेबंदी होती है, तो आम आदमी पर fuel price का बोझ बढ़ेगा। ये तो साफ है।

  • नीतिसंग्राम

    ट्रंप का बयान mixed signal दे रहा है। एक तरफ नाकेबंदी, दूसरी तरफ कीमतें गिरने का दावा। क्या बाजार को भ्रमित करना उनकी strategy है?

  • सागररक्षक

    होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आपूर्ति रुकी तो दुनिया की energy security खतरे में पड़ेगी।

  • विश्लेषक

    ईरान के 2 मिलियन बैरल का निर्यात बंद होना बाजार के लिए बड़ा shock है।

  • कारोबारी

    ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई में 8% की तेजी? ये कोई market panic नहीं, बल्कि असली जोखिम का असर है।

  • भारतवासी

    हम जैसे आयातक देशों के लिए ये खबर बहुत concern की है। crude import महंगा होगा।