अगरकर के बाद कौन? BCCI के सामने चयनकर्ता का बड़ा सवाल
जून 2026 आते-आते भारतीय क्रिकेट के मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर का कार्यकाल खत्म होने वाला है, और सवाल उठ रहा है — क्या उनकी कुर्सी सुरक्षित रहेगी? इस बीच, भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने स्पष्ट किया है कि ऐसे फैसले हल्के में नहीं लिए जाते। उन्होंने कहा, "decision BCCI प्रबंधन के हाथ में होते हैं, ये सामूहिक निर्णय होते हैं, जो सही समय पर भारतीय क्रिकेट के हित में लिए जाते हैं।" इस बयान में न तो पुष्टि है, न खारिज — बस एक leadership की लय, जो समय के साथ चलती है।
हालांकि, अटकलों के बीच, कुछ रिपोर्ट्स यह भी कह रही हैं कि बोर्ड ने अगरकर के कार्यकाल को एक साल के लिए बढ़ा दिया है। यह कदम स्थिरता बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, खासकर 2027 के आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप के मद्देनजर। अगरकर के चयनकर्ता बनने के बाद से — अक्टूबर 2023 से मार्च 2026 के बीच — भारतीय टीम ने चार आईसीसी टूर्नामेंट के फाइनल में जगह बनाई। तीन खिताब जीते, जिनमें दो टी20 वर्ल्ड कप और एक चैंपियंस ट्रॉफी शामिल है। इतनी सफलता के बाद उनका विस्तार almost तय लग रहा है।
एक वरिष्ठ BCCI सूत्र ने स्पष्ट किया कि यह कोई विस्तार नहीं, बल्कि एक कॉन्ट्रैक्ट के रूप में आगे बढ़ावा है। चयनकर्ता के लिए नियम कहते हैं — चार साल तक जूनियर या सीनियर समिति में काम, और कुल मिलाकर पांच साल तक दोनों में। अगरकर अब तक चार साल से कम काम कर चुके हैं, इसलिए नियमों के तहत उन्हें आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने खुद कोई demand नहीं की, लेकिन बोर्ड को लगा कि समय के साथ बदलाव नहीं, स्थिरता चाहिए।
अगरकर के कार्यकाल को साहसिक भी कहा जा रहा है। उनके समय में विराट कोहली और रोहित शर्मा की टेस्ट से संन्यास की घोषणा हुई। तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को धीरे-धीरे टीम से बाहर ले जाया गया। और एक बड़े चयन में, फॉर्म में चल रहे शुभमन गिल को टी20 वर्ल्ड कप टीम में नहीं चुना गया, बल्कि ईशान किशन को मौका दिया गया। ये फैसले आसान नहीं थे, लेकिन टीम के भविष्य को देखकर लिए गए। आगे का रास्ता भी इसी vision से तय होगा।
2027 वर्ल्ड कप तक का सफर अब अगरकर के नेतृत्व में जारी रह सकता है। उनके फैसलों पर तो बहस होती रहेगी, लेकिन नतीजे बोलते हैं। बोर्ड के लिए यह नहीं कि कौन popular है, बल्कि यह कि कौन effective है। अजीत अगरकर के साथ, लगता है, यह समीकरण संतुलित है। वह शायद नायक नहीं बनेंगे, लेकिन विजेता बनाने में उनकी भूमिका नकारी नहीं जा सकती। स्थिरता का यह चुनाव, भारतीय क्रिकेट के लिए अगले कुछ सालों का आधार बन सकता है।
अगर टीम जीत रही है, तो चयनकर्ता को बदलने का क्या logic तर्क है? स्थिरता जरूरी है।
क्या शमी को बाहर करना सही था? वो अभी भी गेंदबाजी कर सकते हैं। pace तेज गेंदबाजी का अनुभव टीम को चाहिए।
अगरकर ने गिल को छोड़कर किशन को चुना — ये फैसला बहुत bold साहसिक था, लेकिन जोखिम लेना जरूरी है।
फैसले समूह के होते हैं, लेकिन जिम्मेदारी एक के कंधों पर। अगरकर अच्छा काम कर रहे हैं। सामूहिक निर्णय का मतलब ये नहीं कि कोई जवाबदेह नहीं।
जब तक ट्रॉफी आ रही है, मैं सपोर्ट करता हूं। टी20 वर्ल्ड कप जीतना बहुत बड़ी बात है।
देखना ये है कि क्या युवा खिलाड़ियों को मौका मिल रहा है। चयनकर्ता का रोल सिर्फ विनिंग कंबिनेशन नहीं, बल्कि भविष्य बनाना भी है।
पहले चयन समिति में बदलाव आता था हर साल। अब स्थिरता अच्छी लग रही है। change परिवर्तन अचानक नहीं, सोच समझकर आना चाहिए।
अगरकर के तीन खिताब अकेले नहीं जीते, लेकिन उनके चयन में रणनीति दिखती है। वो बस नंबर नहीं, नजरिया चुन रहे हैं।