धुरंधर के बाद पाकिस्तान का जवाब: 'मेरा ल्यारी' क्या बदल पाएगी छवि?
बॉक्स ऑफिस पर फिल्म new release 'धुरंधर: द रिवेंज' ने तहलका मचा दिया है। यह फिल्म 1700 करोड़ का व्यापार कर रिकॉर्ड तोड़ रही है, और हर तरफ इसी की चर्चा है। लेकिन इसकी popularity का असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है—पाकिस्तान में भी इसके प्रभाव से इंकार नहीं किया जा सकता। वहां फिल्म पर ban होने के बावजूद लोग इसे देखने के तरीके खोज रहे हैं, और अब पाकिस्तानी फिल्म उद्योग ने इसका जवाब देने का फैसला कर लिया है।
फिल्म 'धुरंधर' में दिखाया गया है कि कैसे नायक हमजा (रणवीर सिंह) पाकिस्तान के ल्यारी में जाता है और वहां के आतंकी रहमान डकैत (अक्षय खन्ना) की गैंग में शामिल होकर सारे terror network को खत्म कर देता है। ल्यारी को गैंगवार और आतंक का गढ़ बताना पाकिस्तानी जनता को offend कर गया। कई लोगों का मानना है कि यह चित्रण उनके इलाके की real culture के खिलाफ है, और इसका जवाब देना जरूरी है।
इसी पृष्ठभूमि में पाकिस्तानी निर्माताओं ने फिल्म 'मेरा ल्यारी' बनाई है, जो कराची के ल्यारी इलाके पर आधारित है। इसका उद्देश्य ल्यारी की एक positive image दिखाना बताया जा रहा है। फिल्म की एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर आयशा ओमर ने कहा है कि वे दुनिया को ल्यारी की other side दिखाना चाहती हैं—जहां लोग नॉर्मल जीवन जीते हैं, सांस्कृतिक विरासत है और समुदाय की ताकत है।
फिल्म का प्रीमियर लंदन के ब्रिटिश फिल्म इंस्टीट्यूट में होगा और यूके एशियन फिल्म फेस्टिवल में 2 मई को दिखाई जाएगी। इसके बाद 8 मई को पाकिस्तान सहित दुनियाभर में रिलीज की जाएगी। आयशा ओमर इस फिल्म में केवल निर्माता ही नहीं, बल्कि एक डेब्यू अभिनय भूमिका भी निभा रही हैं। फिल्म में दानानीर मोबीन, नायर ऐजाज और समीना मुमताज जैसे सितारे भी नजर आएंगे।
अब सवाल यह है कि क्या 'मेरा ल्यारी' वाकई में ल्यारी की public perception बदल पाएगी? क्या यह फिल्म धुरंधर में दिखाए गए narrative का संतुलन कर पाएगी? या फिर यह भी एक नाटकीय प्रतिक्रिया बनकर रह जाएगी? दुनिया अब इस cultural response को कैसे लेती है, यह देखने वाली बात होगी।
मजा आ गया! एक फिल्म ने पूरे देश की public reaction जन प्रतिक्रिया बदल दी।
क्या हैरानी की बात है कि fiction काल्पनिक कथा इतना बड़ा सामाजिक असर डाल सकती है।
ल्यारी के लोगों को offend आहत करना जानबूझकर था—ये तो बॉक्स ऑफिस के लिए था।
अगर भारतीय फिल्में दूसरे देश की local image स्थानीय छवि खराब कर सकती हैं, तो जवाब भी आएगा।
क्या 'मेरा ल्यारी' सच में रहमान डकैत का truth सच दिखाएगी या नया काल्पनिक नाटक?
फिल्में सिर्फ मनोरंजन नहीं, cultural impact सांस्कृतिक प्रभाव भी डालती हैं। ये जवाब भी उसी का हिस्सा है।