बिना पैन के विदेश जाना होगा मुश्किल: नया फॉर्म, नई चुनौती
कल्पना कीजिए: आप पहली बार विदेश जा रहे हैं, पासपोर्ट तैयार है, फ्लाइट टिकट कंफर्म है, लेकिन एक छोटी सी लापरवाही — pan न होना — आपके रास्ते में रुकावट बन जाए। अब यही हो सकता है। नए आयकर नियमों के तहत, form -157 भरना अनिवार्य हो गया है उन सभी के लिए जिनके पास पैन नहीं है या जिनकी आय कर योग्य नहीं है। यह नियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभाव में आ गया है, और इसका उद्देश्य स्पष्ट है: record रखना, ट्रैक करना, पारदर्शिता बढ़ाना। कोई भी नहीं छूटेगा — चाहे आप छात्र हों, गृहिणी या वरिष्ठ नागरिक।
फॉर्म-157 कोई साधारण प्रक्रिया नहीं है। इसे manual रूप से जमा करना होगा, यानी आपको स्वयं अपने क्षेत्रीय निर्धारण अधिकारी के कार्यालय जाना होगा। पहले फॉर्म-156 ऑनलाइन भरा जा सकता था, लेकिन अब यह सुविधा नहीं है। यह process सख्त है, लेकिन थोड़ी लचीली भी — आप फॉर्म में सुधार के लिए अनुरोध कर सकते हैं। यह फॉर्म केवल एक certificate है, लेकिन यह आपके विदेश जाने के अधिकार का द्वार बन गया है।
आपके पास पासपोर्ट होना अनिवार्य है। अगर पासपोर्ट नहीं है, तो जारी करने वाले देश का आपातकालीन प्रमाण पत्र मान्य होगा। however , आधार की जानकारी देना अनिवार्य नहीं है, लेकिन mobile नंबर देने की सलाह दी गई है ताकि सत्यापन तेज हो सके। फॉर्म में आपको केवल अपना नाम, पता, पासपोर्ट नंबर और यात्रा का purpose बताना होगा। कोई टैक्स भुगतान की जानकारी नहीं मांगी जाएगी — यह एक स्व-घोषणा पत्र है, लेकिन इसका भार गहरा है।
यह नियम सभी पर लागू नहीं होता। जिनके पास पैन है और जो नियमित रूप से return भरते हैं, उन्हें छूट है। यात्रा प्रक्रिया उनके लिए वैसी ही रहेगी जैसी पहले थी। लेकिन यहां एक नई दुनिया बन रही है — जहां हर यात्रा event है, और हर इवेंट के लिए अलग फॉर्म। आप जितनी बार बाहर जाएंगे, उतनी बार फॉर्म जमा करना होगा। यह सिर्फ data एकत्र करने की प्रक्रिया नहीं — यह एक नीति का संकेत है: अब कोई भी आर्थिक दायरे से बाहर नहीं।
कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम पारदर्शिता के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन यह बोझ भी तो है। विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो शहरों से दूर रहते हैं या जिन्हें छोटी-छोटी यात्राएं करनी होती हैं। सरकार का तर्क है कि इससे उन मामलों पर नजर रखी जा सकेगी जहां बिना आय दिखाए विदेश यात्रा की जा रही है। लेकिन क्या हर छात्र या बुजुर्ग इसके पीछे के इरादे को समझ पाएगा? यह सवाल अभी खुला है।
ये नियम सिर्फ paperwork कागजी कार्रवाई बढ़ाएगा। गांव के लोगों को शहर आकर अधिकारी के पास जाना पड़ेगा।
अगर ये फॉर्म टैक्स चोरी रोकने में मदद करेगा, तो ठीक है। लेकिन क्या यह really वाकई काम करेगा?
मैं पैन नहीं बनवाता क्योंकि मेरी आय कर योग्य नहीं है। अब छुट्टी पर जाने के लिए भी तनाव होगा।
मुझे लगता है सरकार को इसे online ऑनलाइन उपलब्ध कराना चाहिए। मैन्युअल प्रक्रिया पुराने जमाने की बात है।
इससे डेटा तो जमा होगा, लेकिन क्या कोई इसका उपयोग भी करेगा?
मेरा बेटा पढ़ाई के लिए जा रहा है। अब उसे भी यह फॉर्म भरना होगा।
ये कदम तार्किक है। अगर आप विदेश जा रहे हैं, तो आपकी information जानकारी सरकार के पास होनी चाहिए।
हर नया नियम सुधार का दावा करता है। लेकिन जमीन पर स्थिति अलग होती है।