बिना स्टार के छाई यह सीरीज: कैसे 'अनदेखी' ने OTT को हिला दिया?
क्या आपने कभी सोचा है कि बिना किसी big स्टार के, बिना कोई promotion के, एक सीरीज कैसे पूरे OTT प्लेटफॉर्म पर trend कर सकती है? न तो इसके पोस्टर्स ने शहर की दीवारों को जकड़ा, न ही कोई marketing वाला धमाल मचा। लेकिन फिर भी, दर्शकों की नींद उड़ा देने वाली यह सीरीज — undekhi — घर-घर में छा गई है। इसके पीछे कोई जादू नहीं, बस एक बेहद कच्ची, अधूरी दुनिया की कहानी है, जहां न्याय धुंधला है और बदला साफ।
यह 8 एपिसोड की सीरीज sony liv पर 1 मई को रिलीज़ हुई, और चौथे सीज़न को ही इसका final घोषित किया जा रहा है। लेकिन जैसा कि ऐसी दुनिया में होता है — जहां power के बिना कुछ नहीं चलता — अंत भी एक नया beginning हो सकता है। डायरेक्टर siddharth ने इसे इतने तेज़ गति से बुना है कि आप एक एपिसोड छोड़ने की हिम्मत भी नहीं कर पाएंगे।
कहानी केंद्रित है पापाजी और रिंकू के बीच चल रहे battle पर। पापाजी जेल में हैं, लेकिन उनकी छाया अब भी डराती है। रिंकू को लगता है कि उसकी पत्नी की मौत के पीछे वही है। यहां revenge कोई भावना नहीं, war बन चुका है। हर्ष छाया ने पापाजी का किरदार इतने तीव्रता से निभाया है कि आप उनकी आवाज़ सुनते ही ठिठुर जाएंगे।
इस सीज़न में कहानी पांच साल आगे की दिखाई गई है, जहां पुराने दुश्मन नए रूप ले चुके हैं। नई कास्ट में gautam roade , shiv jyoti , और देबत्तमा साहा ने अपनी उपस्थिति से तनाव को और बढ़ा दिया है। इमोशनल गहराई, मारकाट और थ्रिल के बीच, यह सीरीज बिना किसी लाइट मोमेंट के, आपको अपनी कुर्सी से बांधे रखती है।
IMDb ने भी इसे rating में धांसू नंबर दिया है — जो इसकी quality की पुष्टि करता है। मिर्जापुर जैसी दुनिया का असली आकर्षण उसकी violence नहीं, बल्कि उसकी नैतिक भ्रष्टाचार की गहराई है। 'अनदेखी' भी उसी गलियारे में चलती है — जहां अच्छा और बुरा एक-दूसरे में घुले हैं, और आप खुद को judge देने की कोशिश में खो जाते हैं।
मैंने तीसरा सीज़न तक इग्नोर किया, लेकिन चौथे में तो plot प्लॉट ने दिमाग़ हिला दिया।
क्या सोनी लिव अब नेटफ्लिक्स को टक्कर देगा? बस इतना कहूंगा — content कंटेंट बाज़ी मार रहा है।
हर्ष छाया ने पापाजी की आवाज़ में इतना डर भर दिया कि मैं रात को पानी पीने नहीं उठा।
रिंकू के साथ मेरा दिल है, लेकिन क्या वो सच में justice न्याय पाएगा या बदले में खो जाएगा?
अनदेखी अच्छी है, लेकिन मिर्जापुर का जादू कोई नहीं तोड़ सकता। वहां का dialogue डायलॉग अलग ही लेवल का था।
ट्विस्ट ने तो बस जान ले ली। कौन सोच सकता था कि फिनाले में भी अंत नहीं?
मैं हॉरर नहीं देखता, लेकिन यह सीरीज मेरे रात के सपने बिगाड़ चुकी है।
क्या कोई बता सकता है कि यह सीरीज टीवी पर भी आएगी? क्योंकि यहां screen स्क्रीन बड़ी ज़रूरी है।