जब भारतीयों के चोरी के वीडियो ने बदल दी विदेशों में छवि
कभी हवाई जहाज़ के कॉकपिट से उड़ान भरने वाला pilot तो कभी देश-विदेश में खबरों की गवाही देने वाला journalist —भारतीयों की कुछ हरकतें विदेशों में ऐसी होती हैं कि राष्ट्रीय गरिमा खंडित हो जाती है। बाली में एक परिवार द्वारा होटल के towel और hair dryer चुराए जाने की घटना ने फिर उस शर्म को ताज़ा कर दिया है, जो सालों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारी छवि पर छाई हुई है। ये घटनाएं सिर्फ व्यक्तिगत अनुचित आचरण नहीं, बल्कि एक सामूहिक शर्मिंदगी का प्रतीक बन गई हैं।
लंदन में, 2017 के एक लग्जरी dinner के दौरान कुछ वरिष्ठ पत्रकारों को silverware छिपाते हुए सीसीटीवी कैमरे ने कैद किया। होटल ने न सिर्फ उन्हें expose किया, बल्कि एक पर fine भी लगाया। यह तस्वीर भारतीय media की छवि के साथ-साथ राज्य सरकार के official दौरे की गरिमा को भी धूमिल कर गई।
इसी तरह, सिंगापुर में चार छात्रों ने retail दुकान से कपड़े चुराने के लिए आरएफआईडी टैग हटाए, जिसके बाद उन्हें जेल की सजा मिली। बैंकॉक एयरपोर्ट पर एक भारतीय ने मिस्र के यात्री के bag से नकदी चुराने की कोशिश की, लेकिन सीसीटीवी ने उसे sleeping यात्री के सामने search लेते दिखाया। ये घटनाएं सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि traveler के रूप में हमारे व्यवहार के गहरे प्रश्न खड़े करती हैं।
स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में तो होटल प्रबंधन ने इतना अपमान महसूस किया कि उन्होंने भारतीय पर्यटकों के लिए एक notice लगा दिया कि कटलरी या बुफे का खाना न ले जाएं। यह management का निर्णय सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। सिडनी एयरपोर्ट पर एयर इंडिया के क्षेत्रीय निदेशक को ड्यूटी-फ्री शॉप से एक कीमती wallet चुराते पकड़ा गया—एक ऐसा पल जब हमारे सबसे वरिष्ठ उड्डयन कर्मी ने हमारी छवि को सबसे ज्यादा ठेस पहुंचाई।
ये केवल खबरें नहीं, बल्कि एक सामूहिक प्रतिबिंब का आह्वान हैं। विदेश यात्रा करते समय हमारा आचरण सिर्फ हमारी नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की प्रतिष्ठा तय करता है। जब एक family तौलिया चुराने के लिए माफी मांगे और पैसे देने की पेशकश करे, तो स्टाफ का कहना है कि यह अपमान है—यह बात गहरे में जाती है। क्या हम अपने व्यवहार को बदलने के लिए तैयार हैं, या फिर यह सिलसिला आगे भी चलता रहेगा?
एक journalist पत्रकार को कटलरी चुराते देखकर लगा, हम जिस सच्चाई को पेश करते हैं, वो खुद उससे दूर हैं।
क्या विदेश में ये सब करने के बाद भी लोगों को लगता है कि उनकी पहचान नहीं मिलेगी? सीसीटीवी तो हर जगह है।
सिडनी एयरपोर्ट पर पायलट का मामला सबसे ज्यादा चौंकाने वाला था। उड्डयन के नियमों का पालन करने वाला व्यक्ति खुद कानून तोड़े, ये कैसा विरोधाभास है।
होटल वाले क्यों नहीं कहते कि सामान ले जाने पर कितना charge शुल्क लगेगा? क्या ये सब सिर्फ गरीबी के बहाने नहीं चल रहा?
ज्यूरिख का नोटिस पढ़कर लगा कि हम अपने अतीत के कारण दूसरों की नजरों में पहले से दोषी हैं।
छात्रों को जेल हुई, पत्रकार पर जुर्माना, पायलट निलंबित—सजा तो मिल रही है, लेकिन हरकतें कब बदलेंगी?
बाली में तौलिया चुराने वाला परिवार शायद सोच नहीं पाया कि ये छोटी चीजें भी राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन जाएंगी।
क्या इन सभी घटनाओं के बाद भी हम सीख नहीं पाए? या फिर 'कोई देख नहीं रहा' की मानसिकता अभी भी बाकी है?