संसद का मजाक बना दिया है: कंगना रनौत ने कहा कि राहुल गांधी को सुनना सिरदर्द था
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के शुक्रवार को किए गए संबोधन के बाद बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने उनकी तीखी criticism की है। कंगना ने कहा कि राहुल गांधी ने पूरे nation और world के सामने संसद का मजाक बना दिया। उनका statement ऐसे समय आया है जब महिला आरक्षण बिल पर चर्चा चल रही है और विपक्ष ने सरकार के proposal का विरोध किया है।
कंगना रनौत ने कहा कि राहुल गांधी को listening 'सिरदर्द की तरह' था। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी अपने childhood के सदमें से गुजर रहे थे और उनका speech भावनात्मक और असंतुलित था। कंगना ने कहा कि राहुल ने अपने बचपन के एक जादूगर के बारे में बात की, जिसके मेज पर उसे जंजीरों में बांधा गया था। यह सब कुछ सुनने में painful लगा।
उन्होंने आगे कहा कि सदन के अध्यक्ष ने भी राहुल गांधी से रुकने को कहा। 'तुम्हें मजे आएंगे, तुम मजे लो' जैसी टिप्पणी करना unacceptable था। कंगना ने कहा कि राहुल गांधी ने न केवल संसद का मजाक बनाया, बल्कि उनका behavior पद के अनुरूप नहीं था। उन्होंने कहा कि यह देखकर दुख हुआ कि पूरा देश और दुनिया यह सब witnessing है।
बीजेपी की एक अन्य सांसद हेमा मालिनी ने भी राहुल गांधी की टिप्पणी पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'जादूगर' कहना insulting और असंसदीय था। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में पीएम मोदी पर निशाना साधने के लिए जादू के उदाहरण का उपयोग किया, जिसे बाद में सदन की कार्यवाही से removed गया क्योंकि उन्होंने कुछ offensive शब्दों का इस्तेमाल किया था।
यह घटना महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान हुई, जिसमें सरकार ने महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33% reservation देने के लिए तीन बिल पेश किए। राहुल गांधी विपक्ष के तरफ से इसका विरोध करने आए थे। हालांकि, उनके approach और tone ने चर्चा को निजी और भावनात्मक मोड़ दे दिया, जिसकी आलोचना विपक्ष के कुछ सदस्यों सहित सत्तापक्ष ने की है।
संसद में ऐसा behavior व्यवहार किसी नेता के लिए शोभा नहीं देता। चाहे विरोध हो या समर्थन, respect सम्मान बनाए रखना जरूरी है।
कंगना ने बिल्कुल सही कहा। राहुल गांधी को personal व्यक्तिगत भावनाओं को संसद में नहीं लाना चाहिए था। ये public सार्वजनिक मंच है।
राहुल जी, आपका दर्द समझ आता है, लेकिन क्या इसे platform मंच के लिए ठीक था? संसद का dignity गौरव बना रहना चाहिए।
विपक्ष के नेता का यह reaction प्रतिक्रिया ना सिर्फ असंसदीय थी, बल्कि strategy रणनीति के तौर पर भी विफल रही।
अध्यक्ष ने रोका, मतलब disorder अव्यवस्था थी। भाषण में facts तथ्य होने चाहिए, न कि भावनाएं।
प्रधानमंत्री को 'जादूगर' कहना बिल्कुल wrong गलत था। ये न केवल disrespectful अनादर है, बल्कि लोकतंत्र के लिए खतरनाक भी।