जब साइकिल चली बिना चालक के: सूरत में AI ने बनाया 'भूतिया' आकर्षण
सूरत की सड़कों पर एक bicycle चल रही है — लेकिन उस पर कोई नहीं बैठा। न कोई चालक, न पैर, न आवाज़। फिर भी वह आगे बढ़ रही है, पैडल घुमा रही है, दिशा बदल रही है। लोग आंखें फैलाकर देखते हैं, कुछ तो डर भी जाते हैं। क्या यह technology है या जादू? इसे देखकर लोगों ने इसे ghost साइकिल कहना शुरू कर दिया। लेकिन यह भ्रम नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का नतीजा है। बिना किसी इंसान के चलने वाली यह साइकिल दो युवा दिमागों की रचना है, जिन्होंने तीन महीने की मेहनत से इसे reality में बदल दिया।
इसके पीछे हैं बीटेक के छात्र शिवम मौर्य और उनके साथी गुरप्रीत अरोड़ा। शिवम पहले भी innovation के लिए जाने जाते हैं — उनकी ‘गरुड़ AI बाइक’ ने पहले ही ध्यान खींचा था। इस बार उन्होंने पुरानी साइकिल को नया जीवन दिया है। system के अंदर रास्पबेरी पाई, सेंसर, कंट्रोलर और बैटरी लगे हैं। यह सब मिलकर साइकिल को संतुलन बनाए रखने और बाधाओं से बचने में मदद करते हैं। लागत आई cost महज 35,000 रुपये, लेकिन प्रभाव बहुत बड़ा।
साइकिल को तीन तरीकों से control किया जा सकता है: स्मार्टफोन ऐप, रिमोट कंट्रोल और सबसे दिलचस्प — ऑटोमैटिक मोड। इसमें रूट कोड कर दिया जाता है और साइकिल खुद-ब-खुद चल पड़ती है। balance बनाए रखने के लिए विशेष रिसर्च की गई। मोटर सामने के पहिए में है, जो स्पीड और दिशा नियंत्रित करती है। जबकि लीनियर एक्चुएटर हैंडल को हिलाकर मोड़ता है। और सबसे दिलचस्प बात — पैडल अपने आप चलते हैं। यह भ्रम पैदा करता है कि कोई अदृश्य व्यक्ति चला रहा है। यही impact इसे इतना आकर्षक बनाता है।
शिवम के यूट्यूब चैनल ‘क्रिएटिव साइंस’ के 20 लाख से ज्यादा subscriber हैं। उनकी टीम पिछले 8 से 10 सालों से रोबोट रिक्शा, वन-टायर स्कूटर जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। यह साइकिल उसी vision का हिस्सा है। टेस्टिंग के दौरान लोगों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग थीं — कोई हैरान, कोई डरा, तो कोई जानने को उत्सुक। कुछ ने तो गाड़ी रोककर वीडियो कॉल कर दिया। public का उत्साह देखकर टीम को support की उम्मीद से भी ज्यादा उम्मीद जगी।
यह सिर्फ एक आविष्कार नहीं, बल्कि future की झलक है। जब तकनीक इंसानी डर और हैरानी को चुनौती दे, तो विज्ञान जीतता है। शिवम कहते हैं कि लोगों को लगा कि कोई invisible शक्ति चला रही है। लेकिन यह सब मोटर, कोड और decision का खेल है। यह साइकिल केवल रास्ते पर नहीं, बल्कि लोगों के दिमाग में भी चल रही है।
अगर यह सड़क पर अचानक आ जाए, तो ड्राइवर का reaction प्रतिक्रिया कैसी होगी? यह सुरक्षा के लिए risk जोखिम तो नहीं?
मज़ेदार तो है, लेकिन क्या यह बारिश में भी चलेगी? इलेक्ट्रॉनिक्स पानी में नहीं जीते।
35000 में यह बन गई? काफी affordable किफायती है। अगला कदम क्या है — सेल्फ-ड्राइविंग ऑटो?
पैडल अपने आप चलते देखकर मेरा दिमाग हिल गया। ऐसा लगा जैसे कोई spirit आत्मा हो।
शिवम भाई ने फिर साबित किया कि भारत में भी innovation नवाचार हो रहा है।
क्या यह सच में बाजार में आएगी? या बस एक demonstration प्रदर्शन है?
अगली बार इसे रात में चलाओ, सारे भूत-प्रेत वाले गाने वायरल हो जाएंगे।
प्रोजेक्ट की success सफलता देखकर लगता है कि युवा भारत अब सिर्फ नौकरी नहीं, creation रचना कर रहा है।