रियलिटी शो में खेसारी ने लगाए ठुमके, भोजपुरी गाने पर नाचे शिखर धवन, बजीं सीटियां, वीडियो
रियलिटी शो बैटलग्राउंड सीजन 2 में भोजपुरी सुपरस्टार खेसारी लाल यादव ने अपने swag और धमाकेदार dance से सबका attention खींच लिया है। शो के प्रीमियर एपिसोड में खेसारी ने भोजपुरी गाने पर ठुमके लगाए, जिसे देखकर फैंस झूम उठे। उनकी expressions और body language ने परफॉर्मेंस में चार चांद लगा दिए।
शो के सुपरमेंटर और पूर्व क्रिकेटर शिखर धवन भी खेसारी के साथ थिरकते नजर आए। उनकी energy ने मंच का vibe और भी जीवंत कर दिया। फैंस का मानना है कि पवन सिंह के बाद अब खेसारी का dominance हिंदी ऑडियंस में बढ़ेगा। सोशल मीडिया पर उनकी परफॉर्मेंस की जमकर praise हो रही है।
शो में चार टीमें हैं: मुंबई स्ट्राइकर्स, भोजपुरी भौकाल्स, दिल्ली डोमिनेटर्स और तेलुगू टाइगर्स। खेसारी भोजपुरी भौकाल्स के मेंटर हैं, जबकि शिखर धवन सुपरमेंटर की भूमिका में हैं। पिछले सीजन की तरह इस बार भी मेंटर्स के बीच tension और roasting दर्शकों को लुभा रहा है। इससे शो का entertainment value काफी बढ़ गया है।
16 प्रतियोगियों को चार टीमों में बांटा गया है। प्रियंका, अभिषेक मल्हान और खेसारी के बीच जमकर rivalry देखने को मिल रही है। फैंस को शिखर धवन की वापसी से खासा joy हुआ है, क्योंकि वे मेंटर्स के बीच तनाव को resolve हैं और शो को emotional support देते हैं। वे शो के असली pillar बनकर उभरे हैं।
इस सीजन में भोजपुरी संस्कृति की झलक दर्शकों को खास connect महसूस कराती है। खेसारी के डांस ने न सिर्फ नए दर्शक आकर्षित किए, बल्कि भोजपुरी कला को राष्ट्रीय मंच पर spotlight में लाने में भी मदद की है। ऐसे में लगता है कि यह साल भोजपुरी सिनेमा और संगीत के लिए एक नए milestone की तरह हो सकता है।
खेसारी ने तो शो में fire आग लगा दी। उनका entry एंट्री बहुत ही धमाकेदार था।
शिखर धवन को डांस करते देखकर smile मुस्कान आ गई। वो शो में positive vibe सकारात्मक ऊर्जा फैलाते हैं।
खुशी है कि हमारी संस्कृति को इतना recognition मान मिल रहा है। भोजपुरी अब सिर्फ एक क्षेत्रीय पहचान नहीं रही।
मेंटर्स के बीच drama नाटक ज्यादा है, लेकिन शिखर की वजह से balance संतुलन बना रहता है।
खेसारी के बाद expectation उम्मीदें बहुत बढ़ गई हैं। क्या वो अगले सीजन में host होस्ट बनेंगे?
लगता है भोजपुरी कलाकारों के लिए अब mainstream platform मुख्यधारा का मंच खुल गया है। सांस्कृतिक बदलाव धीरे-धीरे दिख रहा है।