IPO लॉक-इन खत्म होने जा रहा है: ₹5 लाख करोड़ के शेयर बाजार में आएंगे, इन स्टॉक्स पर नजर
15 अप्रैल 2026 से भारतीय stock market में एक बड़ी supply की लहर आने वाली है। आईपीओ लॉक-इन समाप्ति के तहत 81 कंपनियों के लगभग ₹5 लाख करोड़ के शेयर trading के लिए खुल जाएंगे। यह अवधि अप्रैल से लेकर जुलाई तक रहेगी, जब प्री-लिस्टिंग shareholders को अपने हिस्से बेचने की freedom मिल जाएगी। बाजार में इसके कारण pressure बढ़ने की आशंका है, खासकर उन स्टॉक्स में जहां अनलॉक शेयरों का प्रतिशत अधिक है।
अप्रैल 2026 में 10 से अधिक कंपनियों के लगभग ₹1.2 लाख करोड़ के शेयर बाजार में आएंगे। प्रमुख नामों में LG Electronics India, Bharat Coking Coal और Hyundai Motor India शामिल हैं। जून तक यह दौर चरम पर पहुंचेगा, जब Meesho, Pine Labs और Lenskart जैसी हाई-प्रोफाइल कंपनियों के शेयर unlock होंगे। इस दौरान बाजार में volatility बढ़ सकती है, क्योंकि बिकवाली की expectation से investor sentiment प्रभावित हो सकती है।
लॉक-इन अवधि SEBI के नियमों के तहत होती है, जिसके तहत प्रमोटर्स, एंकर निवेशक और शुरुआती निवेशकों को आईपीओ के बाद तय समय तक शेयर नहीं बेचने दिए जाते। अब जब यह अवधि खत्म हो रही है, तो बाजार में supply-demand balance बिगड़ सकता है। यह price पर सीधा प्रभाव डाल सकता है, खासकर उन कंपनियों में जहां बड़े पैमाने पर हिस्सेदारी अनलॉक हो रही है।
हालांकि, सभी शेयरहोल्डर अपने हिस्से बेच नहीं देंगे। कई प्रमोटर long-term तक अपनी हिस्सेदारी बनाए रखते हैं, लेकिन short-term pressure निश्चित है। निवेशकों को इस दौरान fundamentals पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए। कमजोर कंपनियों में गिरावट आ सकती है, लेकिन स्थिर वित्तीय स्थिति वाली कंपनियों में गिरावट buying opportunity बन सकती है।
यह अनलॉक चक्र बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षण है। अगर बिकवाली बहुत तेज होती है, तो market index में गिरावट आ सकती है, लेकिन अगर मांग भी तेज रहती है, तो बाजार स्थिर रह सकता है। निवेशकों को selective investment और data-based decision लेने की जरूरत है। इस दौर में risk management सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है।
इतनी बड़ी supply आपूर्ति से कीमतों पर दबाव तो आएगा ही, लेकिन क्या यह panic selling घबराकर बिकवाली जैसा नहीं हो जाएगा?
Meesho और Lenskart जैसी कंपनियों में तो unlock अनलॉक के बाद गिरावट लगभग तय है। शुरुआती निवेशक मुनाफा बुक करेंगे।
अगर fundamentals मौलिक स्थिति अच्छी है, तो यह buying opportunity खरीदारी का अवसर भी हो सकता है। सिर्फ डरकर भागने की जगह नहीं।
बाजार में volatility अस्थिरता बढ़ेगी, ये तो साफ है। लेकिन क्या कोई नियामक intervention हस्तक्षेप करेगा अगर स्थिति बिगड़ी?
हर कंपनी में बिकवाली नहीं होगी। कई प्रमोटर long-term लंबी अवधि के लिए हिस्सेदारी रखते हैं। अति-संवेदनशीलता ठीक नहीं।
इस phase चरण में risk management जोखिम प्रबंधन कितना अहम हो जाएगा, ये अब तक कई ने नहीं समझा।