हिमालय और होर्मुज का गहरा रिश्ता: एक ही सागर के दो चेहरे
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज आज global trade की एक महत्वपूर्ण नस है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा oil supply गुजरती है। यहां के rising tension ने तेल की market price पर direct impact डाला है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस संकरे जलमार्ग का जन्म भी एक विशाल सागर के अंत से हुआ, जिसके अवशेषों ने हजारों किलोमीटर दूर हिमालय को भी जन्म दिया?
लगभग 25 करोड़ साल पहले पृथ्वी पर tectonic plates अलग जगह थीं। उत्तर में लौरेशिया और दक्षिण में गोंडवाना थे, और उनके बीच फैला था विशाल टीथिस सागर, जो पूरी दुनिया को काटता था। धीरे-धीरे ये प्लेटें टकराने लगीं। अरेबियन प्लेट के यूरेशियन प्लेट से टकराने पर टीथिस सागर का पश्चिमी हिस्सा सिकुड़ गया और आज का narrow channel , स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, बन गया।
इसी गतिविधि ने ईरान में जाग्रोस पर्वत भी pushed up । लेकिन पूर्व में, लगभग 5 करोड़ साल पहले, भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट से टकराई। चूंकि दोनों महाद्वीप थे, एक दूसरे के नीचे नहीं गए, बल्कि ऊपर उठे। टीथिस सागर का समुद्री तल, जिसमें marine sediment , चूना पत्थर और जीवों के अवशेष थे, परत दर परत दब गया और massive mountain के रूप में ऊपर उठा — हिमालय।
आज भी एवरेस्ट की चोटी पर fossil मिलते हैं, जो साबित करते हैं कि वहां कभी समुद्र था। वैज्ञानिक कहते हैं कि टीथिस सागर का complete closure अभी भी जारी है। यही कारण है कि होर्मुज में वर्तमान भू-राजनीतिक तनाव न सिर्फ आज की नौसेना रणनीति का हिस्सा है, बल्कि पृथ्वी के लाखों साल पुराने भूवैज्ञानिक नाटक की एक निरंतरता भी।
दोनों जगहें — एक ऊर्जा की धमनी, दूसरी प्रकृति की विशालता का प्रतीक — एक ही सागर की विरासत हैं। एक जगह जलधारा बनी, दूसरी पर highest peak । यह न केवल natural history की अद्भुत गाथा है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे भूगोल के पुराने forces आज भी वैश्विक economic risk और strategic decision को प्रभावित करते हैं।
हिमालय के फॉसिल के बारे में पहले नहीं जानता था। लगता है प्रकृति की transformation परिवर्तन की ताकत को हम कम ही समझ पाते हैं।
होर्मुज सिर्फ एक भूगोल का हिस्सा नहीं, बल्कि global economy वैश्विक अर्थव्यवस्था का दिल है। एक छोटा संकट भी पेट्रोल के pump price पंप कीमत को बढ़ा सकता है।
यह खबर दिखाती है कि आज का political tension राजनीतिक तनाव भी भूविज्ञान से जुड़ा है। प्लेटें तो लाखों साल से हिल रही हैं, लेकिन इंसान अभी भी अल्पकालिक सोच में फंसा है।
टीथिस सागर का नाम स्कूल के नक्शे में था, लेकिन यह जानकर हैरानी हुई कि वही ancient sea प्राचीन सागर आज के दोनों बड़े geographic feature भौगोलिक तत्व का जन्मदाता है।
सोचिए, एक ऐसी जगह जहां आज जहाज तेल लेकर गुजरते हैं, वहीं लाखों साल पहले marine life समुद्री जीवन था। और हिमालय की चोटी पर ancient ocean प्राचीन महासागर के निशान। क्या बात है!
अगर प्लेटें अभी भी हिल रही हैं, तो क्या भविष्य में होर्मुज बंद हो सकता है? क्या यह future scenario भविष्य का संभावित दृश्य है? कहीं न कहीं यह ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरा तो नहीं?