ऋषभ पंत नहीं, संजीव गोयनका को असली टेंशन तो इस खिलाड़ी ने दे रखी, 21 करोड़ में टीम में किया था शामिल
लखनऊ सुपर जायंट्स (एलएसजी) के लिए आईपीएल 2026 का आगाज़ मिलाजुला रहा है। गेंदबाजी ने तो pressure बनाए रखा है, लेकिन बल्लेबाजी ने निराश किया है। टीम के शीर्ष क्रम में कई नाम हैं जिन्होंने अपनी क्षमता के मुताबिक performance नहीं किया। और उनमें सबसे चिंताजनक है निकोलस पूरन का मामला — जिन्हें 21 करोड़ में retained किया गया था, लेकिन अब तक के चार मैचों में एक भी अर्धशतकीय पारी नहीं खेल सके।
पूरन, जो टी20 क्रिकेट में दुनिया के सबसे खतरनाक बल्लेबाजों में गिने जाते हैं, इस सीज़न अपनी विस्फोटक छवि के अनुरूप नहीं खेल पाए। चार पारियों में उनके नाम सिर्फ 41 रन दर्ज हैं, जिसमें उच्चतम स्कोर महज 19 रन है। उनकी बल्लेबाजी में failure ने टीम के मध्यक्रम को कमजोर कर दिया है। युवा बल्लेबाजों पर pressure बढ़ गया है, जिसे वे अक्सर झेल नहीं पाते।
एलएसजी ने अब तक चार मैचों में से दो जीते हैं और अंकतालिका में 7वें स्थान पर है। बिना मुकुल चौधरी की कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ memorable innings के, स्थिति और भी खराब हो सकती थी। प्लेऑफ़ की दौड़ में बने रहने के लिए, टीम को पूरन के form में लौटने की तत्काल आवश्यकता है। जिस तरह की आक्रामक बल्लेबाजी वे कर सकते हैं, वह किसी और बल्लेबाज़ से उम्मीद नहीं की जा सकती।
पूरन को 2023 में 16 करोड़ में खरीदा गया था और आईपीएल 2025 से पहले 21 करोड़ में retained किया गया। पिछले सीज़न उन्होंने 14 मैचों में 524 रन बनाए, जिसमें 196.25 की स्ट्राइक रेट शामिल थी। अपने 94 आईपीएल मैचों में उन्होंने 2,334 रन बनाए हैं। उनकी क्षमता ज्ञात है, लेकिन इसी कारण उनकी वर्तमान form टीम प्रबंधन के लिए बड़ी concern का विषय बनी हुई है।
एलएसजी की सफलता अब पूरन के response पर निर्भर करती है। अगर वे जल्दी से अपनी छवि के अनुरूप performance करने में सक्षम हो गए, तो टीम प्लेऑफ़ की दौड़ में वापसी कर सकती है। लेकिन अगर यह slump लंबा खिंचता है, तो उनकी उच्च फीस के कारण आलोचना बढ़ेगी और टीम की गति और भी धीमी हो जाएगी।
21 करोड़ में खरीदे गए खिलाड़ी के लिए 19 रन का स्कोर बिल्कुल अस्वीकार्य है। ये pressure दबाव नहीं सह पा रहे?
पूरन की क्षमता से इंकार नहीं किया जा सकता, लेकिन आईपीएल जैसे टूर्नामेंट में form फॉर्म तो तुरंत चाहिए, इंतजार नहीं किया जा सकता।
संजीव गोयनका को टेंशन नहीं, तो किसे होगी? एक खिलाड़ी के failure असफलता से पूरी टीम की रणनीति बिगड़ रही है।
अगर वो एक बार फ्लप हिट लगाने लगे, तो देखते ही देखते सब ठीक। लेकिन इतनी slump स्लम्प में रहना खतरनाक है।
पिछले सीज़न की 196 की स्ट्राइक रेट के बाद ये प्रदर्शन देखकर disappointment निराशा होती है।
क्या टीम मैनेजमेंट ने गलती की कि उनके बिना कोई विकल्प तैयार नहीं किया? एक खिलाड़ी पर इतना dependence आधार जोखिम भरा है।