ग्रीन पार्क के छात्र से लेकर आईपीएल के अंपायर तक: तन्मय श्रीवास्तव की नई पारी
कभी बल्लेबाजी के लिए चर्चित रहे cricketer तन्मय श्रीवास्तव अब नए रूप में मैदान पर लौट रहे हैं — एक umpire के तौर पर। 2008 के अंडर-19 विश्व कप में भारत के साथ जीत का हिस्सा रहे श्रीवास्तव, आईपीएल 2025 में field पर न्याय करते दिखेंगे। उत्तर प्रदेश के पहले पूर्व खिलाड़ी जो इस league में अंपायरिंग करेंगे, उनकी यह वापसी एक पूरी पीढ़ी के संघर्ष और समर्पण की कहानी है।
शुरुआत तो 11 साल की उम्र में ग्रीन पार्क के छात्रावास से हुई थी, जहां कोच रमेश पाल ने उनकी technique सिखाई। वर्ष 2000 से 2008 तक उनका प्रशिक्षण यहीं जारी रहा। अंडर-19 टीम में विराट कोहली के साथ खेलने का अनुभव उनके करियर का पाइवट पॉइंट था। फाइनल में साउथ अफ्रीका के खिलाफ 46 रन की महत्वपूर्ण पारी ने न सिर्फ टीम को आगे बढ़ाया, बल्कि उनके नाम को स्थायी बना दिया। उस जमाने के युवा उत्साह का आज एक नया रूप दिख रहा है।
अपने खिलाड़ी करियर में उन्होंने 90 प्रथम श्रेणी मैच खेले, जिसमें 4918 रन बनाए। लिस्ट ए और टी-20 में भी उनका योगदान रहा। 2020 में retirement के बाद उन्होंने दूसरी पारी की शुरुआत की — अंपायरिंग के जरिए। बीसीसीआइ की examination पास करना इस नए सफर की पहली उपलब्धि थी। आईपीएल के सख्त माहौल में निष्पक्ष निर्णय लेने की जिम्मेदारी कोई छोटी बात नहीं है।
तन्मय आईपीएल 2025 में कुल 10 मैचों में अंपायरिंग करेंगे — चार में field , एक में टीवी और पांच में फोर्थ अंपायर के रूप में। उनका पहला मैच 28 अप्रैल को पंजाब और राजस्थान रायल्स के बीच होगा। इसके बाद दिल्ली, रायपुर और चेन्नई में भी वे मैदान पर नजर आएंगे। यह नहीं कि वे नए हैं — 2008 और 2009 में वे किंग्स इलेवन पंजाब के लिए भी खेल चुके हैं। अब वे role बदल चुके हैं, लेकिन मैदान का प्यार वही है।
एक ऐसे खिलाड़ी का सफर, जो छोटे से छात्रावास से शुरू हुआ, विश्व कप तक पहुंचा और अब भारत की सबसे बड़ी टी-20 लीग में निष्पक्षता का प्रतीक बन रहा है। यह सिर्फ एक करियर बदलाव नहीं, बल्कि खेल के प्रति एक लगातार जुड़ाव की कहानी है। जहां कभी उनके बल्ले ने रन बनाए, आज वहीं उनकी न्यायशक्ति मैच का रुख तय करेगी। match के हर पल में उनकी उपस्थिति एक इतिहास की विरासत लेकर चलती है।
कानपुर का बेटा, गर्व है! proud गर्व है आप पर तन्मय भैया।
अब तो देखना होगा कि विराट कोहली के साथ उनकी जोड़ी फील्ड में कैसे काम करती है — एक अंपायर, एक खिलाड़ी!
90 प्रथम श्रेणी मैच खेलने वाला खिलाड़ी अब अंपायर बने, यह देखकर respect सम्मान बढ़ गया।
क्या आईपीएल में पहले किसी उप्र के पूर्व खिलाड़ी ने अंपायरिंग की थी? curious जिज्ञासा है।
2008 के विश्व कप में 46 रन बनाने वाला लड़का अब फैसले दे रहा है — टाइमिंग तो अच्छी है!
अंपायरिंग में भी उतनी ही focus एकाग्रता चाहिए जितनी बल्लेबाजी में। बधाई।
आईपीएल में खेलना भी मुश्किल है, अंपायर बनकर निष्पक्ष रहना और भी मुश्किल।
ग्रीन पार्क से लेकर चेन्नई तक का सफर — एक journey यात्रा जो प्रेरणा देती है।