सड़कों पर चेतावनी बजेगी: TRAI का डिजिटल बचाव अभियान शुरू?
roads पर हर साल हज़ारों जानें जाती हैं, लेकिन अब technology एक नए मोड़ पर है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने एक ऐसी वायरलेस प्रणाली को लेकर चर्चा शुरू की है जो न केवल दुर्घटनाओं की alert देगी, बल्कि यातायात के प्रवाह को भी सुधार सकेगी। इस proposal का उद्देश्य ऐसे डिजिटल नेटवर्क बनाना है जो गाड़ियों, यातायात संकेतों और नेटवर्क बुनियादी ढांचे को एक-दूसरे से connect सके — लगभग तुरंत।
इसमें vehicle के बीच सीधे संचार की क्षमता होगी, जिसे व्हीकल-टू-एवरीथिंग (V2X) कहा जाता है। गाड़ियों में लगे विशेष device एक-दूसरे को बताएंगे कि आगे कोई दुर्घटना हुई है, कोई वाहन losing control रहा है, या यातायात का दबाव बढ़ रहा है। यह सब real-time में होगा, बिना मोबाइल नेटवर्क पर निर्भरता के।
इस तकनीक को लागू करने के लिए TRAI ने 5.9 गीगाहर्ट्ज बैंड में स्पेक्ट्रम आवंटन पर चर्चा शुरू की है। विशेषज्ञों का मानना है कि डेडिकेटेड शॉर्ट-रेंज कम्युनिकेशन (DSRC) और 5G-आधारित सेल्यूलर-V2X दोनों ही इस mission में अहम भूमिका निभा सकते हैं। त्वरित data transfer के जरिए यह सुनिश्चित होगा कि critical जानकारी किसी देरी के बिना पहुंचे।
सरकार का लक्ष्य न केवल सुरक्षा बढ़ाना है, बल्कि automobile और दूरसंचार क्षेत्रों को भी एकीकृत करना है। डॉ. के. रविंदर, केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान के प्रिंसिपल साइंटिस्ट, कहते हैं कि पहले expressway पर इसका परीक्षण किया जाना चाहिए। भविष्य में, यह प्रणाली smart city और कनेक्टेड हाईवे की नींव बन सकती है। सुरक्षा अब सिर्फ एयरबैग तक सीमित नहीं रहेगी — यह एक डिजिटल ढाल के रूप में उभर रही है।
अगर ये system सिस्टम गांवों में भी काम करे, तो बड़ा फर्क पड़ेगा।
V2X के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन जरूरी है, लेकिन क्या टेलीकॉम कंपनियां इसे सपोर्ट करेंगी?
एक्सप्रेसवे से शुरुआत तर्कसंगत है — कम ट्रैफिक, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर।
मेरे बच्चे स्कूल जाते हैं, अगर बस को अलर्ट मिले कि आगे एक्सीडेंट है, तो बहुत अच्छा होगा।
डेटा कौन संभालेगा? गोपनीयता का खतरा तो नहीं?
ये सब लगता है कार वालों के लिए है। हम दोपहिया वालों के लिए क्या?
ये कदम स्मार्ट इंडिया के सपने को और करीब लाता है।