टॉक्सिक में छिपा गेम-चेंजर: यश ने कैसे बदला एक्शन सिनेमा का नजरिया?
star यश ने अपने नए प्रोजेक्ट 'टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स' के बारे में बात करते हुए फिल्म इंडस्ट्री को एक नई direction दिखा दी है। सिनेमाकॉन 2026 में उनके शब्दों ने जैसे सभी के ध्यान को एक साथ खींच लिया। उन्होंने कहा कि आज तक बड़े scale की गैंगस्टर फिल्में मुख्य रूप से पुरुष निर्देशकों के नजरिए से बनी हैं, लेकिन 'टॉक्सिक' उस परंपरा को तोड़ती है। गीतू मोहनदास के निर्देशन में यह फिल्म एक ऐसा experience लाएगी जो न केवल दृश्यों में बल्कि भावनाओं में भी ताजगी लाएगा।
यश ने गीतू मोहनदास के दृष्टिकोण को 'गेम-चेंजर' बताया। उनके मुताबिक, फीमेल गेज में छिपी संवेदनशीलता फिल्म को नई depth देती है। “एक्शन में एक नया एंगल आया है,” उन्होंने कहा। यह सिर्फ थ्रिल नहीं, बल्कि emotion का भी खेल है। आमतौर पर एक्शन फिल्मों में नरमी कम, जोर ज्यादा होता है, लेकिन इस बार एक महिला निर्देशक का approach पूरी तरह अलग है — स्पष्ट, प्रभावशाली और भावुक।
फिल्म के action सीक्वेंस में भी नई ऊर्जा है। हॉलीवुड के मशहूर कोरियोग्राफर J. J. Perry के सहयोग से ये दृश्य न केवल तेज, बल्कि दृष्टिगत रूप से spectacle से भरपूर होंगे। यश ने कहा कि फिल्म में काम करना उनके लिए एक परिवर्तनकारी सफर रहा। इमोशन्स, रोमांस और सेंसुअलिटी को समझने के उनके पुराने understanding को यह प्रोजेक्ट बदल रहा है।
फिल्म में नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी और अन्य ताकतवर अभिनेत्रियों की presence कहानी को कई परतें देती है। यश के अनुसार, यह सिर्फ एक एक्शन फिल्म नहीं — यह एक balance है। थ्रिल के साथ feelings , बड़े दृश्यों के साथ गहन विचार। KVN Productions और Monster Mind Creations के बैनर तले बनी यह फिल्म 4 जून 2026 को release होगी, और दर्शकों को एक cinematic अनुभव का वादा करती है जो लंबे समय तक याद रहे।
अब तक सिर्फ पुरुष ही बड़े एक्शन प्रोजेक्ट्स डायरेक्ट करते रहे, तो क्या अब बदलाव आएगा? change बदलाव अच्छा है, लेकिन एक्शन में भावनाएं कैसे फिट बैठेंगी?
गीतू मोहनदास के नाम से पहले नहीं सुना था, लेकिन यश की बात सुनकर लगता है कि ये फिल्म ब्रेकथ्रू हो सकती है।
J. J. Perry? हॉलीवुड के एक्शन मास्टर! अब तो फिल्म का sequence सीक्वेंस देखना जरूरी हो गया।
एक्शन + इमोशन = संतुलन। लेकिन क्या बॉलीवुड दर्शक इस mix मिश्रण को स्वीकार करेंगे? या फिर फिल्म दोनों में अधूरी रह जाएगी?
नयनतारा और कियारा एक साथ? ये कास्ट ही कहानी की गहराई दिखा रही है।
गेम-चेंजर बोलना आसान है, लेकिन अगर निर्देशन ढीला रहा, तो ये सिर्फ एक और ओवरहाइप्ड फिल्म बनकर रह जाएगी।
यश के चेहरे पर जो उत्साह था, वो झलक फिल्म में भी दिखे — बस इतना ही काफी है।
सेंसुअलिटी को एक महिला के नजरिए से पेश करना — ये तो बहुत देर से हुआ। नजरिया बदलने की जरूरत थी।