हिंदू ऐक्ट्रेस को बार-बार बीफ खाने के लिए कहते दिखे ऐक्टर करीम, विवाद होने पर दी सफाई
मलयालम फिल्म जगत के अभिनेता शियास करीम एक नए controversy में घिर गए हैं, जब एक वीडियो सामने आया जिसमें वे हिंदू अभिनेत्री अनुमोल अनुकुट्टी को बार-बार beef खाने के लिए कहते दिख रहे हैं। वीडियो में करीम का behavior कई लोगों को अपमानजनक लगा, खासकर क्योंकि बीफ का मुद्दा भारतीय संदर्भ में धार्मिक और सांस्कृतिक sensitivity से जुड़ा है।
इस घटना के बाद जब public reaction तेज हुई, तो करीम ने सफाई देते हुए कहा कि यह एक दोस्ताना banter का हिस्सा था। उन्होंने कहा, "पेरुम्बावूर में दोस्तों के बीच यह आम है, बीफ न खाने वाले दोस्त को ताने दिए जाते हैं।" उन्होंने जोर देकर कहा कि अनुमोल के साथ उनकी बातचीत पूरी तरह friendly थी और किसी को दुखी करने का इरादा नहीं था।
हालांकि, कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने इसे casual मजाक नहीं माना। उनका कहना है कि जब कोई public figure किसी धार्मिक आस्था से जुड़े भोजन विकल्प पर टिप्पणी करता है, तो यह सीमा पार करने जैसा होता है। कुछ ने इसे सांस्कृतिक insensitivity का उदाहरण बताया।
इस मामले ने फिर से चर्चा छेड़ दी है कि कलाकारों की private interaction को जब वीडियो के जरिए सार्वजनिक किया जाता है, तो उसका impact कैसे बढ़ जाता है। साथ ही, यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या humor की आड़ में धार्मिक विश्वासों का उपहास ठीक है, खासकर जब वह किसी की identity के केंद्र में हो।
अगर यह कोई निजी बातचीत थी, तो वीडियो कैसे लीक हुआ? private निजी बातों को सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी भी किसी न किसी पर होनी चाहिए।
करीम ने apology माफी नहीं मांगी, बस सफाई दी। यह बड़ा अंतर है। एक सच्ची regret पछताहट में तो भावनाएं होती हैं।
मैं मलयालम फिल्म इंडस्ट्री की दोस्ती की culture संस्कृति जानती हूं, लेकिन food खाने को लेकर ताने मारना कभी ठीक नहीं होता, चाहे कितना भी casual आम क्यों न हो।
इस तरह के मामले दिखाते हैं कि celebrity सेलिब्रिटी होने के नाते आपकी हर action क्रिया पर नजर रहती है।
अनुमोल ने अब तक कोई response प्रतिक्रिया नहीं दी है। मुझे उनके दृष्टिकोण जानने में दिलचस्पी है। क्या वाकई उन्हें कोई offense आपत्ति नहीं हुई?
बस एक बात: अगर कोई हिंदू अभिनेता मुस्लिम दोस्त को pork सूअर का मांस खाने के लिए कहता, तो क्या यह भी 'दोस्ताना मजाक' कहलाता?