एजेयूपी ने कहा: विवादित वीडियो का पूरा संस्करण जल्द आएगा सामने

विवादित वीडियो मामले में आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) ने अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए decision सुनाया है कि वे वीडियो का full version जल्द सार्वजनिक करेंगे। पार्टी प्रवक्ता कमाल हुसैन ने रविवार को कहा कि जो वीडियो इंटरनेट मीडिया पर फैल रहा है, वह edited है, और उसके जरिए हुमायूं कबीर की public image को नुकसान पहुंचाने की deliberate attempt की गई है।

हुसैन ने आगे बताया कि वीडियो की authenticity की जांच के लिए उसे केंद्रीय फॉरेंसिक प्रयोगशाला में भेजा गया है, और इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट का भी door खटखटाया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मूल वीडियो date 19 दिसंबर 2025 का है, लेकिन इसे 8 अप्रैल को पोस्ट किया गया — इस लंबे gap को लेकर उन्होंने conspiracy का आरोप लगाया।

प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि अगर वीडियो इतना महत्वपूर्ण था, तो तृणमूल कांग्रेस ने उसे उस समय क्यों नहीं जारी किया? उनका दावा है कि तृणमूल pressure में आई है क्योंकि हुमायूं कबीर खतरे के रूप में उभर रहे हैं, इसलिए ऐसी tactics अपनाई जा रही हैं।

वीडियो में हुमायूं कबीर को allegedly भाजपा नेताओं के साथ संबंधों की बात करते सुना जा रहा है, साथ ही money transactions को लेकर भी टिप्पणियां हैं। लेकिन पार्टी का कहना है कि वीडियो का असली context गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। हुमायूं कबीर ने खुद वीडियो को fake बताया है, और जागरण ने इसकी स्वतंत्र verification नहीं की है।

इस पूरे episode ने विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राजनीतिक atmosphere में तनाव बढ़ा दिया है। एजेयूपी की ओर से पूरा वीडियो जारी करने का promise एक direct challenge है, जिससे अगले कुछ दिनों में public reaction और जांच के नतीजे अहम हो जाएंगे।

टिप्पणियाँ 6

  • सचधारी

    अगर वीडियो एडिट किया गया है, तो पूरा वर्जन क्यों नहीं तुरंत जारी किया? delay खुद शक को बढ़ाती है।

  • नीतिवाद

    तृणमूल को घेरने के बजाय, पहले यह साबित करें कि वीडियो फेक है। allegation लगाना काफी नहीं है।

  • कलकत्तावासी

    हाई कोर्ट तक गए हैं तो अब legal process अपना रास्ता बनाएगी। बस राजनीति के लिए जांच को न रोका जाए।

  • देखता_रहूं

    19 दिसंबर को वीडियो बना, 8 अप्रैल को छोड़ा — इस timing के फासले में क्या हुआ, यही सवाल है।

  • जनस्वर

    लोगों को भरोसा नहीं है कि वीडियो एडिट नहीं हुआ। public trust तब बढ़ेगा जब सबूत सामने आएंगे।

  • विश्लेषक

    यह सिर्फ एक वीडियो नहीं, political strategy का हिस्सा है। 2026 के लिए मैदान साफ करने की कोशिश।