UP Weather Today, 17 April: यूपी में धूप और पछुआ का दोहरा हमला, लखनऊ में पारा 40 के करीब, तप रहा गाजियाबाद-नोएडा भी
उत्तर प्रदेश में गर्मी ने अब सिर्फ तापमान नहीं, बल्कि dual challenge बनकर लोगों को परेशान कर दिया है। एक ओर चटख धूप और तपती पछुआ हवाओं ने तापमान को 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंचा दिया है, तो दूसरी ओर गिरती हवा की गुणवत्ता लोगों के लिए नए खतरे के रूप में उभरी है। लखनऊ में अधिकतम तापमान 39.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो normal level से 1.3 डिग्री अधिक है। लोग दोपहर में सड़कों से गायब हैं, क्योंकि गर्मी और तपिश ने घरों में रहने को मजबूर कर दिया है।
इस बीच, एनसीआर के शहरों में pollution crisis भी बढ़ता जा रहा है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में तापमान 38–39 डिग्री के बीच पहुंच गया है, लेकिन असली चिंता एक्यूआई के स्तर पर है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, गाजियाबाद का एक्यूआई 308 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। यहां का एक्यूआई पिछले कुछ दिनों में 170 से बढ़कर 308 हो गया है, जो rapid deterioration स्थिति को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कम हवा की रफ्तार और धूल भरी हवाओं के कारण प्रदूषण के कण accumulate हो रहे हैं और smog-like conditions बन रहे हैं। यह स्थिति सांस की बीमारियों से ग्रस्त लोगों के लिए विशेष रूप से खतरनाक है। अगर हवा की गति में सुधार नहीं हुआ, तो प्रदूषण और worsen है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, अगले 2–3 दिनों तक मौसम dry बना रहेगा, जिससे तापमान में और वृद्धि हो सकती है।
मौसम विभाग ने 21 से 24 अप्रैल के बीच तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की आशंका जताई है। इसके साथ ही लू चलने की चेतावनी भी जारी की गई है। इस दौरान दिन के समय बाहर निकलना खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों की ओर से बच्चों, बुजुर्गों और respiratory patients को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। लोगों को दोपहर में बाहर न निकलने, मास्क पहनने और adequate fluids लेने की सिफारिश की गई है।
गाजियाबाद में तो घर से बाहर निकलना ही मुश्किल हो गया है। air quality हवा की गुणवत्ता इतनी खराब है कि सांस लेने में तकलीफ हो रही है।
क्या authorities अधिकारी अब भी सोए हुए हैं? एनसीआर में धूल और प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कोई effective measures प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा।
लखनऊ में भी तपिश बर्दाश्त से बाहर है। बच्चे और बुजुर्ग suffering पीड़ित हैं। क्या इस गर्मी के मौसम में कोई ठंडी जगह का प्रावधान है?
एक तरफ तो धूप, दूसरी तरफ प्रदूषण। यह double pressure दोहरा दबाव शरीर पर कैसे नहीं असर डालेगा?
मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद कोई public awareness जन जागरूकता अभियान नहीं चल रहा। लोगों को जोखिम के बारे में पता ही नहीं है।
क्या forecast पूर्वानुमान के मुताबिक बारिश की कोई संभावना है? वर्षा ही तो इस हालात को बदल सकती है।