दक्षिण भारत में प्री-मॉनसून की दस्तक, पूर्वोत्तर में तबाही मचाएगी बारिश; जानें कहां आएगा तूफान-गिरेंगे ओले
अब गर्मी के लिए तैयार रहिए, क्योंकि relief का दौर लगभग खत्म हो चुका है। पिछले करीब एक पखवाड़े से उत्तर भारत में मौसम में थोड़ी change आया था, लेकिन अब भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, गर्मी वापस लौट रही है और अधिक intensity से। 12 अप्रैल, 2026 को दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में सुबह से ही तेज धूप और धूल भरी हवाओं के साथ दिन शुरू हुआ। वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ अब उत्तर भारत पर अपना impact खो चुका है, जिसके बाद तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होगी।
आने वाले दिनों में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में maximum temperature 40 डिग्री सेल्सियस के पार जा सकता है। गुजरात और मुंबई में न सिर्फ गर्मी बढ़ेगी, बल्कि उमस भी लोगों को discomfort करेगी। मौसम विभाग के अनुसार, यह परिवर्तन स्थायी नहीं है, लेकिन अगले सप्ताह तक इन क्षेत्रों में गर्मी का असर साफ महसूस होगा। ऐसे में बाहर निकलने पर sun exposure से बचाव के उपाय जरूरी हो जाएंगे।
इस बीच, पहाड़ी राज्यों में मौसम अभी भी active है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में रविवार को हल्की बारिश, बर्फबारी और ओलावृष्टि की warning जारी की गई है। यह स्थिति पश्चिमी विक्षोभ के कारण बनी हुई है, जो अब उत्तर भारत के मैदानों पर असर नहीं डाल रहा, लेकिन पर्वतीय क्षेत्रों में अभी भी disturbance बनाए हुए है।
दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर में स्थिति और भी चिंताजनक है। एक चक्रवाती परिसंचरण के कारण अगले 24 से 36 घंटों में असम, सिक्किम, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा में 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से storm winds चलने के साथ भारी बारिश और ओलावृष्टि की संभावना है। पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में भी यही situation रहेगी।
इसके अलावा, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में pre-monsoon activity सक्रिय हो गई हैं। इसका मतलब है कि यहां अब बारिश का दौर शुरू हो सकता है, जो आमतौर पर मई के अंत तक बढ़कर मानसून में बदल जाता है। यह गतिविधियां खेती और जल संसाधनों के लिए फायदेमंद तो हो सकती हैं, लेकिन अचानक आए weather event लोगों के लिए चुनौती भी बन सकते हैं।
मुंबई में तो अब उमस और गर्मी का combination संयोजन बर्दाश्त से बाहर हो रहा है। ऑफिस जाते वक्त पसीने में नहाना पड़ता है।
हिमाचल में बर्फबारी के बाद सड़कें बंद हो गई हैं। यात्रियों को travel plans यात्रा योजना में बदलाव करना पड़ रहा है।
असम में 70 किमी की रफ्तार से हवाएं? ये तो serious concern गंभीर चिंता की बात है। पेड़ उखड़ रहे होंगे।
प्री-मॉनसून बारिश से किसानों को relief राहत मिलेगी। पानी की कमी कम होगी।
हर साल यही cycle चक्र दोहराया जाता है। गर्मी, फिर बारिश, फिर बाढ़। कोई long-term solution दीर्घकालिक समाधान कब मिलेगा?
IMD की forecast पूर्वानुमान सटीक रही। चक्रवाती परिसंचरण को सही पकड़ा गया।