कश्मीर से लद्दाख तक: एक छोटे शहर का टेक हब
गोमती नदी के किनारे बसा एक छोटा सा शहर, लेकिन यहां का institute छात्रों के सपनों को आकार दे रहा है — न सिर्फ उत्तर प्रदेश से, बल्कि कश्मीर से लद्दाख तक से आए युवा यहां इंजीनियरिंग की education के लिए जुटते हैं। कमला नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (KNIT), सुल्तानपुर में स्थित एक ऐसा national स्तर का केंद्र बन चुका है, जहां तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता इतनी ऊंची है कि पूरे देश के छात्र यहां आकर study करने को तैयार रहते हैं।
साल 1976 में established यह संस्थान शुरू में कमला नेहरू मेमोरियल ट्रस्ट के तत्वावधान में एक प्रौद्योगिकी संकाय के रूप में शुरू हुआ। फिर 1979 में उत्तर प्रदेश सरकार ने इसका control संभाल लिया और इसे पूर्ण इंजीनियरिंग संस्थान बनाने की मिशन में लग गई। 1983 में इसे एक स्वतंत्र organization के रूप में registered किया गया और नाम बदलकर कमला नेहरू प्रौद्योगिकी संस्थान कर दिया गया — एक नाम जो अब उत्कृष्टता का प्रतीक बन चुका है।
आज, KNIT सिर्फ एक स्थानीय संस्थान नहीं, बल्कि एक reputation वाला technical मंच है। यहां के students देश की बड़ी इंजीनियरिंग कंपनियों में jobs हासिल कर रहे हैं। यहां तक कि कई छात्र abroad में भी अपने skills के बल पर सफलता हासिल कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के छात्रों के लिए यहां एक विशेष scheme के तहत प्रवेश की व्यवस्था है, जो इसे एक समावेशी learning के केंद्र में बदल रही है।
प्रोफेसर राजीव कुमार उपाध्याय, KNIT के निदेशक, कहते हैं कि उनका दृष्टिकोण ऐसे इंजीनियर तैयार करना है जो विश्व स्तर के चुनौतियों का सामना कर सकें। यहां के पाठ्यक्रम में नवाचार और practical ज्ञान पर जोर दिया जाता है। छात्रों को सिर्फ theory नहीं, बल्कि वास्तविक दुनिया के अनुभव भी मिलते हैं — एक ऐसा माहौल जो उन्हें industry के लिए तैयार करता है।
मेरा भाई यहां पढ़ता है। उसके अनुसार, facilities सुविधाएं वाकई बेहतरीन हैं।
जम्मू-कश्मीर से आने वाले छात्रों के लिए यह योजना बहुत helpful मददगार है।
एक छोटे जिले में इतनी बड़ी उपलब्धि देखकर गर्व होता है।
लेकिन क्या प्लेसमेंट के आंकड़े वाकई इतने मजबूत हैं? आंकड़े कहां हैं?
अच्छा है कि विदेश में भी छात्र सफल हो रहे हैं।
हमारे शहर का नाम राष्ट्रीय स्तर पर है, यह सुनकर गर्व महसूस होता है।
1976 से चल रहा है — लंबा सफर है। लेकिन अब तक की journey यात्रा सराहनीय है।
मैं लद्दाख से हूं। यहां का वातावरण सीखने के लिए बहुत supportive सहायक है।