लोहे और पानी की बैटरी: चीन की वो तकनीक जो लिथियम को हिला सकती है
कल्पना कीजिए एक ऐसी बैटरी जो सिर्फ लोहे और पानी से बनी हो, लिथियम बैटरी के मुकाबले 80% सस्ती हो और छह हजार से ज्यादा charge चक्र बरकरार रहे। चीन के वैज्ञानिकों ने ठीक यही कर दिखाया है। उन्होंने technology के जादू से एक पुराने विचार को नया जीवन दिया — ऑल-आयरन फ्लो बैटरी। यह कोई नई खोज नहीं, लेकिन अब तक इसकी अस्थिरता के कारण इसे practical नहीं माना जाता था।
समस्या यह थी कि बैटरी के अंदर के liquid में रसायन लीक हो जाते थे, जिससे बैटरी जल्दी खराब हो जाती थी। लिथियम-आयन बैटरी ज्यादा स्थिर थी, इसलिए उसे तरजीह दी जाती रही। लेकिन चीनी वैज्ञानिकों ने academy के साथ मिलकर एक चतुर इंजीनियरिंग समाधान ढूंढा — 'सिनर्जिस्टिक डिजाइन'। यह एक अदृश्य सुरक्षा कवच की तरह काम करता है, हानिकारक आयनों को लोहे के केंद्र तक पहुंचने से रोकता है।
इस सुधार के बाद, बैटरी का प्रदर्शन लगातार 6,000 चक्रों में बिल्कुल स्थिर रहा। इसका मतलब है लंबी उम्र और कम बदलाव की जरूरत। यह तकनीक न सिर्फ उपकरणों के cost को नीचे लाएगी, बल्कि बिजली भंडारण के large-scale पर खर्च में भी भारी कमी कर सकती है।
सबसे बड़ी बात — यह पर्यावरण-अनुकूल है। लोहा और पानी आसानी से available संसाधन हैं, खतरनाक या दुर्लभ तत्वों की जरूरत नहीं। यह तकनीक आम उपभोक्ताओं तक पहुंची, तो यह न सिर्फ smartphone और vehicle को सस्ता बनाएगी, बल्कि सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में नवीकरणीय ऊर्जा के संग्रहण को भी किफायती बना देगी।
अगर यह बैटरी वाकई इतनी अच्छी है, तो अपनाने में कितना वक्त लगेगा?
80% सस्ती तो लगता है, लेकिन क्या यह फोन में इतनी जगह नहीं लेगी? size आकार के बारे में कुछ कहा गया है?
लोहे और पानी से बनी बैटरी? यह तो स्थायी भविष्य की ओर पहला कदम है।
6,000 चार्ज चक्र मतलब 10 साल तक चले तो भी बैटरी बदलने की जरूरत नहीं। दक्षता ऐसी ही बनी रहे तो बहुत बड़ी छलांग होगी।
लिथियम की तुलना में ऊर्जा घनत्व क्या है? क्या यह इलेक्ट्रिक कारों के लिए viable व्यवहार्य होगी?
अगर बिजली भंडारण सस्ता हो गया, तो गांवों में भी सौर पैनल के साथ इसका इस्तेमाल हो सकता है।
हमारे फोन की बैटरी हर साल खराब होती है, ऐसी लंबे समय तक चलने वाली तकनीक सचमुच आशीर्वाद होगी।