तेल-गैस की छोड़ो टेंशन, सोलर पैनल की चिकचिक भी फीकी, ये एक बैटरी 433 साल तक देगी बिजली
तेल-गैस की चिंता छोड़ दें, सोलर पैनल की चमक भी अब फीकी पड़ सकती है—वैज्ञानिक एक ऐसी nuclear battery बनाने में जुटे हैं, जो लगभग 433 साल तक continuous बिजली दे सकती है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण हाल ही में हार्मुज जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति प्रभावित हुई, लेकिन अब वैज्ञानिक उन ऊर्जा समस्याओं से परे जा रहे हैं जो अंतरिक्ष मिशनों को रोकती हैं। जहां सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती, वहां सोलर पैनल बेकार हो जाते हैं। अब अमेरिकी एजेंसी नासा और ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ लेस्टर collaborating एक ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं जो दशकों तक बिना रुके ऊर्जा दे सके।
यह बैटरी अमेरिशियम-241 पर आधारित है, जिसकी half-life लगभग 433 साल है। इसका मतलब है कि यह बहुत धीरे-धीरे decays होता है और लंबे समय तक स्थिर गर्मी पैदा करता है। यह गर्मी फिर बिजली में बदल दी जाती है। वर्तमान समय में प्लूटोनियम-238 का उपयोग होता है, जिसकी आधी उम्र केवल 88 साल है। वॉयेजर जैसे मिशन आज भी इसी ऊर्जा पर चल रहे हैं, लेकिन 433 साल की आधी उम्र वाली नई बैटरी भविष्य के दूरस्थ अंतरिक्ष अभियानों के लिए एक क्रांति साबित हो सकती है।
नासा के ग्लेन रिसर्च सेंटर और यूनिवर्सिटी ऑफ लेस्टर ने जनवरी 2025 में heat source का परीक्षण शुरू किया। उन्होंने फ्री-पिस्टन स्टर्लिंग कन्वर्टर के साथ एक इलेक्ट्रिकली हीटेड सिमुलेटर का उपयोग किया। परिणाम उत्साहजनक रहे: प्रणाली दशकों तक बिना maintenance के चल सकती है। इसमें पिस्टन सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में तैरते हैं, तापमान अंतर से गति आती है, और यह गति बिजली में बदल जाती है।
अमेरिशियम-241 नाभिकीय अपशिष्ट से प्राप्त किया जा सकता है, जिससे यह अपेक्षाकृत cheaper और आसानी से उपलब्ध हो सकता है। प्लूटोनियम-238 की कमी एक बड़ी चुनौती रही है, लेकिन Am-241 एक व्यवहार्य विकल्प बन रहा है। सुरक्षा परीक्षण जैसे हाई वेलोसिटी इम्पैक्ट भी सफल रहे हैं।
हालांकि, यह तकनीक अभी परीक्षण चरण में है। यह सिर्फ अंतरिक्ष तक सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में यह दूरदराज के इलाकों, आपदा प्रबंधन या ऐसे उपकरणों में उपयोगी हो सकती है जो लंबे समय तक बिना चार्ज के चलें। लेकिन रेडिएशन शील्डिंग, सुरक्षा और बड़े पैमाने पर उत्पादन अभी बड़ी चुनौतियां हैं।
अगर यह तकनीक पृथ्वी पर आ गई, तो दूरस्थ गांवों में power supply बिजली आपूर्ति की समस्या खत्म हो सकती है।
433 साल तक चलने वाली बैटरी? यह तो game-changer खेल बदलने वाला है। अंतरिक्ष अनुसंधान में क्रांति आ जाएगी।
लेकिन क्या यह सच में safe सुरक्षित होगी? रेडिएशन वाली चीजों से डर लगता है।
फ्री-पिस्टन स्टर्लिंग कन्वर्टर में efficiency दक्षता ज्यादा है, लेकिन क्या यह ठंडे अंतरिक्ष में भी स्थिर रहेगा?
अगला मिशन यूरेनस या नेपच्यून पर हो, तो यह long-duration लंबी अवधि के लिए आदर्श होगी।
सस्ता होने की बात कर रहे हैं, लेकिन क्या mass production मास प्रोडक्शन वाकई संभव है? अभी तो यह सिर्फ प्रयोगशाला में है।