गौतम गंभीर खाटू श्याम मंदिर पहुंचे, बताया क्यों बाबा को कहा जाता है 'हारे का सहारा'
आईपीएल के मैदानों की excitement अभी चरम पर है, लेकिन इसी बीच एक अलग तरह की भावनात्मक momentum राजस्थान के खाटू श्याम मंदिर में देखने को मिली। भारतीय क्रिकेट टीम के कोच गौतम गंभीर ने बुधवार (15 अप्रैल) को मंदिर पहुंचकर न सिर्फ prayer की, बल्कि मीडिया के साथ एक ऐसी बात साझा की जिसने उनकी छवि को गहराई दे दी। वे बाबा श्याम के उस लोकप्रिय उपाधि — ‘हारे का सहारा’ — के पीछे के अर्थ को समझाते हुए बोले कि जो इंसान loss जाता है, वहीं बाबा के दरबार में आता है। और बाबा ही सबका सहारा हैं।
गंभीर के इस statement ने न सिर्फ श्रद्धालुओं की emotions को छुआ, बल्कि उनके खेल के बाहर के व्यक्तित्व को भी उजागर किया। मंदिर में मंत्री मानवेन्द्रसिंह चौहान ने उन्हें श्याम दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मानित किया। यह दृश्य moment भक्ति और सम्मान का था। गंभीर के चेहरे पर गहरी calmness साफ झलक रही थी, जैसे वे सचमुच एक भक्त के रूप में मंदिर में आए हों।
इससे पहले, क्रिकेटर हरभजन सिंह ‘भज्जी’ भी एक महीने में दूसरी बार यहां पहुंचे थे। विश्व कप जीतने के बाद उनकी यह दूसरी यात्रा भी टीम इंडिया के success के लिए आशीर्वाद मांगने के उद्देश्य से थी। यह दिखाता है कि शीर्ष क्रिकेटर spirituality को खेल के दबाव से निपटने का माध्यम मानते हैं। खेल में pressure और नतीजों के बीच, ऐसी यात्राएं मानसिक balance की तलाश का संकेत देती हैं।
गंभीर के मंदिर पहुंचते ही श्रद्धालुओं में excitement की लहर दौड़ गई। क्रिकेट प्रशंसकों ने उनके साथ selfie लेने के लिए जमकर होड़ मचा दी। मंदिर परिसर में एक तरह का festival जैसा माहौल बन गया। यह देखने वाली बात है कि खेल के महानायक public space में आस्था की इस तरह से उपस्थिति कैसे एक सामूहिक भावना को बढ़ावा देती है।
खाटू श्याम मंदिर सिर्फ भक्ति का केंद्र नहीं रह गया है, बल्कि यह खेल और राजनीति की हस्तियों के लिए भी एक symbolic स्थल बन चुका है। असम की मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी हाल में चुनावों से पहले यहां पूजा की थी। गंभीर का आगमन न सिर्फ एक personal belief का प्रदर्शन है, बल्कि यह खेल जगत में आस्था के बढ़ते महत्व का भी सबूत है।
गंभीर ने बिल्कुल सही कहा — जो हार जाता है, वही बाबा के दरबार में आता है। यही तो trust भरोसा है जो हर भक्त को खींचता है।
आजकल के खिलाड़ी न सिर्फ मैदान पर, बल्कि आस्था में भी confidence विश्वास जता रहे हैं। गंभीर का ये कदम उनके mental strength मानसिक ताकत को दिखाता है।
हमारे यहां भक्ति और खेल का मेल पुराना है। पर गंभीर आए तो माहौल ही बदल गया। crowd भीड़ इतनी थी कि लग रहा था कोई मैच चल रहा हो।
क्या ये सब सिर्फ public image सार्वजनिक छवि सुधारने के लिए है? या असली faith आस्था है? दोनों में अंतर होता है।
भज्जी दो बार आए, गंभीर आए — खेल जगत के लोग बाबा के प्रति devotion भक्ति दिखा रहे हैं। ये अच्छा संकेत है।
जब तक दिल में विनम्रता होगी, तब तक बाबा के दरबार में आने का मतलब होगा। गंभीर ने वो gesture इशारा किया जो दिल तक पहुंचा।