अब दुनिया भर में दिल्ली मेट्रो का राज: DMIL के साथ नई उड़ान
क्या दिल्ली की भीड़-भाड़ वाली मेट्रो सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया के लिए भी रास्ता दिखाएगी? corporation के तौर पर जाने जाने वाले DMRC ने अब वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बनाने के लिए एक नई इकाई का गठन किया है। इस इकाई का नाम है—दिल्ली मेट्रो इंटरनेशनल लिमिटेड (limited ) या DMIL। अब यह न सिर्फ भारत के शहरों में, बल्कि foreign में भी मेट्रो परियोजनाओं का निर्माण, संचालन और रखरखाव संभालेगी। यह एक ऐसा कदम है जो भारत की इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता को वैश्विक मंच पर ले जाता है।
इस नई यात्रा की कमान संजय जमुआर के हाथों में है, जिन्हें DMIL का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (ceo ) नियुक्त किया गया है। जमुआर का दिल्ली मेट्रो के साथ लंबा सफर रहा है—1998 में जब इसकी नींव रखी जा रही थी, तब वे इसके पहले operations और maintenance अधिकारी के रूप में शामिल हुए थे। उनके पास भारतीय रेलवे और DMRC के अलावा ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस, मध्य पूर्व और यूरोप में काम करने का व्यापक अनुभव है। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी मजबूत है—diploma रणनीतिक नेतृत्व में वारविक बिजनेस स्कूल से और लीड्स विश्वविद्यालय से research परिवहन अर्थशास्त्र में।
DMRC के प्रधान कार्यकारी निदेशक अनुज दयाल के अनुसार, DMIL का मुख्य उद्देश्य अन्य देशों और स्थानीय सरकारों को मेट्रो प्रणालियों के विकास, सुधार और दीर्घकालिक योजनाएं तैयार करने में परामर्श सेवाएं प्रदान करना है। अब तक DMRC ने भारत के लगभग सभी प्रमुख मेट्रो परियोजनाओं में सलाहकार की भूमिका निभाई है। अब DMIL के जरिए यह न केवल सिफारिशें करेगी, बल्कि मेट्रो के पूर्ण management और operations में भी उतरेगी। यह एक बड़ा कदम है जो 'मेक इन इंडिया' के दायरे को सेवाओं तक बढ़ाता है।
इस नई इकाई के गठन के पीछे न सिर्फ तकनीकी विशेषज्ञता है, बल्कि एक बड़ी vision भी छिपी है। दिल्ली मेट्रो ने भारत में शहरी परिवहन के स्वरूप को बदल दिया है। अब यह ज्ञान और अनुभव विदेशों में भी उतरेगा। ऐसे में सवाल उठता है: क्या दुनिया के अन्य शहर भारतीय तरीके की efficiency और punctuality को अपनाने के लिए तैयार हैं? क्या DMIL वैश्विक बाजार में चुनौतियों का सामना कर पाएगी? यह यात्रा अभी शुरू हुई है, लेकिन इसके संकेत स्पष्ट हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाना बहुत बड़ी बात है। उम्मीद है DMIL success सफलता हासिल करेगी।
क्या विदेशी शहर DMRC की सख्त समयसूची को संभाल पाएंगे? हमारी schedule अनुसूची तो लगभग बुलेट ट्रेन जैसी है।
संजय जमुआर का अनुभव वाकई कमाल का है। एक leader नेता जो नींव से जुड़ा रहा, वो ही नई इमारत की दिशा तय करे, यही तो चाहिए।
अब तो सिर्फ सलाह नहीं, पूरा operation संचालन संभालेंगे? देखना होगा कैसे निभाते हैं विदेशी दबाव।
मुझे लगता है भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर नॉलेज दुनिया के लिए उपयोगी हो सकता है।
क्या इससे भारतीय इंजीनियरों के लिए नौकरियां भी बढ़ेंगी? opportunity अवसर की बात तो कहीं नहीं आई।
एक भारतीय संस्था का ग्लोबल एंट्री—यह गर्व की बात है।
बहुत जल्दी में लग रहा है। डीएमआरसी को घर पर ही और सुधार करने चाहिए थे।