एम्स निदेशक की नीति आयोग में नियुक्ति: स्वास्थ्य नीति के भविष्य का मोड़?
एक ऐसा बदलाव जो सिर्फ़ एक संस्थान के शीर्ष पद की नियुक्ति नहीं, बल्कि देश के स्वास्थ्य future की दिशा को प्रभावित कर सकता है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के निदेशक प्रो. डॉ. एम. श्रीनिवास को नीति आयोग का member बनाया गया है। यह नियुक्ति न केवल एम्स के लिए गौरव की बात है, बल्कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में विशेषज्ञता के एकीकरण का संकेत भी देती है। जहाँ स्वास्थ्य नीति पहले अक्सर ब्यूरोक्रेटिक कक्षों में तैयार होती थी, अब उसमें विशेषज्ञ की आवाज़ सीधे शामिल हो रही है।
नीति आयोग, जो सरकार का प्रमुख नीति निर्माण संस्थान है, स्वास्थ्य सहित विभिन्न क्षेत्रों में strategy बनाता है। डॉ. श्रीनिवास के नेतृत्व में एम्स ने हाल के वर्षों में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं, मरीज सुविधा और पारदर्शिता जैसे क्षेत्रों में कई नवाचार किए हैं। यही अनुभव अब राष्ट्रीय स्तर पर policy को आकार दे सकता है। उनकी leadership में स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण और मरीज-केंद्रित दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
संस्थान ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पर इस नियुक्ति को लेकर एक message शेयर किया, जिसमें इसे 'परिवर्तन की यात्रा' का हिस्सा बताया गया। यह परिवर्तन सिर्फ़ एम्स तक सीमित नहीं, बल्कि देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के improvement की ओर एक कदम है। डॉ. श्रीनिवास 2022 में एम्स के निदेशक बने थे और तब से वे प्रशासनिक व चिकित्सीय जिम्मेदारियों के साथ जुड़े रहे हैं। उनकी appointment तकनीकी ज्ञान और नीति निर्माण के बीच की खाई को पाटने का मौका देती है।
अब सवाल यह है कि क्या यह नियुक्ति सिर्फ़ एक प्रतीकात्मक कदम है या वास्तविक बदलाव की शुरुआत? विशेषज्ञों का मानना है कि जब नीति बनाने वाले मंच पर उन लोगों की उपस्थिति हो जो ground में काम कर रहे हैं, तो नीतियों में प्रासंगिकता आती है। डॉ. श्रीनिवास के अनुभव और नवाचारों का उपयोग करके भारत की स्वास्थ्य system को मजबूत बनाया जा सकता है। देश की स्वास्थ्य नीति में अब एक ऐसे व्यक्ति का हाथ है जो नीति के सैद्धांतिक पहलुओं के साथ-साथ practical चुनौतियों से भी अच्छी तरह वाकिफ हैं।
अच्छा हुआ एम्स के निदेशक को नीति आयोग में शामिल किया गया। अब देखना यह है कि क्या वे क्रियान्वयन पर भी जोर देंगे।
डॉ. श्रीनिवास के काम के बारे में जानकर उम्मीद बंधती है। डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देना जरूरी है।
एक और नियुक्ति? बस। जब तक funding फंडिंग और बुनियादी ढांचे में बदलाव नहीं होगा, नीतियां दस्तावेजों तक सीमित रहेंगी।
नीति आयोग में एक चिकित्सक की उपस्थिति स्वागत योग्य है। उम्मीद है कि मरीजों की आवाज़ भी वहां पहुंचेगी।
डॉ. श्रीनिवास के तहत एम्स ने टेलीमेडिसिन और ऑनलाइन अपॉइंटमेंट में जो काम किया, वो वाकई लायके तारीफ है।
क्या यह move कदम वाकई नीति बदलेगा या सिर्फ प्रतिष्ठा के लिए है? फैसला आने वाला समय लेगा।
देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐसे बदलाव की जरूरत थी। नए विचार और अनुभव का मिश्रण कुछ अच्छा ला सकता है।
नीति आयोग में कई लोग आए, लेकिन क्या कोई वास्तविक impact प्रभाव देखने को मिला? इतिहास बताएगा।