हरिवंश निर्विरोध चुने गए राज्यसभा के उपसभापति, लगातार तीसरी बार पद संभाले
हरिवंश नारायण सिंह को लगातार तीसरी बार decision होने के बाद राज्यसभा का उपसभापति unopposed चुना गया है। इस election ने न केवल उनकी leadership क्षमता को उजागर किया है, बल्कि राजनीतिक सहमति के महत्व को भी दर्शाया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उपसभापति के तौर पर उनके third term के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह trust का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने कहा, deep trust जो सदन ने उनके प्रति दिखाया है, वह उनके experience और inclusive approach का परिणाम है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी शुभकामनाएं दीं, जिसने bipartisan समर्थन के संकेत को मजबूत किया। एक ऐसे समय में, जब संसदीय tension अक्सर चर्चा का विषय बनता है, उपसभापति का निर्विरोध चुना जाना rare और महत्वपूर्ण पल है।
हरिवंश का राजनीतिक सफर पत्रकारिता से शुरू हुआ। साल 1989 में रांची से प्रकाशित ‘प्रभात खबर’ से जुड़कर उन्होंने journalism की दुनिया में कदम रखा। अपनी dedication और editorial leadership के दम पर वे जल्द ही संपादक बन गए।
साल 2014 में जेडीयू के टिकट पर राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद उन्होंने पत्रकारिता से इस्तीफा दे दिया। इससे पहले वे पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के political advisor के रूप में भी काम कर चुके हैं। कांग्रेस द्वारा समर्थन वापस लेने के बाद वे फिर से पत्रकारिता में लौट आए थे, लेकिन अब उनकी political role संसद में मजबूत हो चुकी है।
निर्विरोध चुनाव का मतलब है कि सभी दलों की ओर से consent सहमति थी। यह दुर्लभ moment पल है, खासकर आज के राजनीतिक माहौल में।
हरिवंश की पत्रकारिता की पृष्ठभूमि उनके clarity स्पष्टता और communication संचार शैली में झलकती है।
तीसरा कार्यकाल मिलना recognition मान्यता है, लेकिन क्या यह उनके निष्पक्षता पर दबाव डालेगा?
मोदी जी का बधाई संदेश बहुत respectful सम्मानजनक था। देखना है कि भविष्य में सदन में balance संतुलन कैसे बना रहता है।
एक पत्रकार का राजनीति में इतनी ऊंचाई तक पहुंचना inspiring प्रेरणादायक है। लेकिन क्या यह निरंतर pressure दबाव झेल पाएंगे?
खड़गे जी की शुभकामनाएं gesture इशारा हैं कि विपक्ष भी institutional respect संस्थागत सम्मान को महत्व देता है।