बिहार में NDA की नई सरकार का क्या रहा है आरजेडी और कांग्रेस से संबंध? जान लीजिए इसके पीछे की पूरी कहानी
बिहार में नई सरकार के formation के बाद राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी ने शपथ ली, जबकि जदयू के दो वरिष्ठ नेता विजेंद्र प्रसाद यादव और विजय चौधरी उपमुख्यमंत्री बने। यह पहली बार है जब भाजपा के नेता मुख्यमंत्री के पद पर हैं और जदयू के नेता डिप्टी सीएम की भूमिका में हैं। यह power-sharing संरचना राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ लाती है।
हालांकि, सरकार के तीनों नेताओं के राजनीतिक background पर सवाल उठ रहे हैं। सम्राट चौधरी ने राजद में 14 साल तक सक्रिय रहते हुए राबड़ी देवी की सरकार में मंत्री पद संभाला था। 2013 में जब वे जदयू में शामिल हुए, तो यह एक बड़ा political shift था। बाद में 2018 में भाजपा में जाने से पहले वे जीतन राम मांझी के गुट के साथ भी रहे। उनके राजद से गहरे connection अब विपक्ष में मुद्दा बन रहे हैं।
उपमुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव की राजनीतिक शुरुआत जनता दल से हुई थी। लालू प्रसाद यादव के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्हें ऊर्जा मंत्री का दायित्व दिया गया था। वे शरद यादव के नजदीकी रहे और 2003 में जदयू के formation के बाद से नीतीश कुमार के loyal सहयोगी बने। उनकी नीतिश के प्रति वफादारी ने उन्हें अहम position पर पहुंचाया।
वहीं, विजय चौधरी की राजनीति कांग्रेस से शुरू हुई। उनके पिता कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे। विजय ने कांग्रेस के टिकट पर तीन बार विधानसभा चुनाव जीते। 2005 में जदयू में joining के बाद उन्होंने नीतीश कुमार के साथ लंबा सफर तय किया। दोनों उपमुख्यमंत्री को अहम ministries सौंपे गए हैं, जो उनके influence को दर्शाता है।
इस सरकार का संदर्भ यह है कि इसके तीनों मुख्य नेता पहले अलग-अलग political circles से आते हैं। आरजेडी, कांग्रेस और जनता दल से लिए गए ये नेता अब एनडीए के तहत एक साथ बैठे हैं। यह realignment बिहार के राजनीतिक दृश्य को बदल सकता है। लेकिन यह भी सवाल है कि क्या इतिहास के इन टुकड़ों से एक stable सरकार बन पाएगी?
सम्राट चौधरी का राजद से past अतीत है, लेकिन क्या वे भाजपा के सिद्धांतों के साथ loyal वफादार रह पाएंगे? यही biggest concern सबसे बड़ी चिंता है।
विजेंद्र यादव और विजय चौधरी दोनों नीतीश के trusted भरोसेमंद चेहरे हैं। उनकी experience अनुभव नई सरकार के लिए फायदेमंद होगी।
एक तरफ भाजपा का दावा है कि वे राजद के खिलाफ हैं, तो दूसरी ओर उनके मुख्यमंत्री का entire career पूरा करियर राजद में बीता। क्या यह पर ध्यान नहीं जाना चाहिए?
राजनीति में change बदलाव आते रहते हैं। जो आज विरोधी हैं, कल साथी बन जाते हैं। यह नया coalition गठबंधन भी उसी की एक कड़ी है।
नीतीश कुमार ने बुद्धिमत्ता से काम लिया। विजेंद्र और विजय दोनों को साथ रखकर उन्होंने balance संतुलन बनाया है। अब देखना है कि governance शासन कैसे होता है।
क्या इतने सारे political shifts राजनीतिक बदलाव के बाद भी नेता जनता के real issues असली मुद्दों पर ध्यान दे पाएंगे? विकास कब शुरू होगा?