राजबंशी भाषा को मान्यता, नारायणी रेजिमेंट का वादा: शाह ने उत्तर बंगाल के लिए क्या-क्या ऐलान किए?
उत्तर बंगाल में भाजपा की सरकार बनने पर, राजबंशी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में recognition देने और भारतीय सेना में नारायणी रेजिमेंट के गठन का वादा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने किया है। यह promise कूचबिहार सहित उत्तर बंगाल के कई जनसभाओं में किया गया, जहां राजबंशी समुदाय की भाषाई और सांस्कृतिक identity को लेकर लंबे समय से आंदोलन चल रहा है।
नारायणी रेजिमेंट की demand ऐतिहासिक जड़ों से जुड़ी है। कूचबिहार पहले कोच राजवंश के अधीन था, जहां नारायणी सेना एक प्रमुख military unit थी। समुदाय के लोग चाहते हैं कि भारतीय सेना में भी इसी legacy के आधार पर एक रेजिमेंट की स्थापना हो, जो उनके सांस्कृतिक गौरव को मजबूत करे।
अमित शाह ने यह भी कहा कि भाजपा की सत्ता में वापसी होने पर उत्तर बंगाल का comprehensive development किया जाएगा। इसके तहत एम्स अस्पताल, कैंसर उपचार केंद्र, अलग आईआईटी और आईआईएम के कैंपस की स्थापना की जाएगी। चाय श्रमिकों की minimum wage की मांग को भी पूरा करने का वादा किया गया है, जो इस क्षेत्र के लिए आर्थिक relief का संकेत है।
इसके अलावा, महिलाओं को मासिक 3000 रुपये और बेरोजगार युवाओं को भत्ता देने की योजना का भी ऐलान किया गया। शाह ने ममता बनर्जी सरकार पर आरोप लगाया कि पिछले 15 साल में उत्तर बंगाल के लिए nothing significant । उन्होंने भ्रष्टाचार और घुसपैठ के खिलाफ strong stance का वादा किया, साथ ही 4 मई को मतगणना के बाद अशांति फैलाने वालों के लिए warning भी दी।
ये वादे राजनीतिक strategy के साथ-साथ उत्तर बंगाल के विभिन्न समुदायों की grievances को संबोधित करने के प्रयास के तौर पर देखे जा रहे हैं। विशेष रूप से 54 विधानसभा सीटों वाले इस क्षेत्र में राजबंशी समुदाय का 20-25 सीटों पर प्रभाव है, जहां उनके मत decision कर सकते हैं।
राजबंशी भाषा को मान्यता मिलना सिर्फ symbolic प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि संस्कृति के प्रति सम्मान है। लेकिन देखना यह है कि वादे पूरे होते हैं या चुनाव के बाद भूल जाए जाते हैं।
नारायणी रेजिमेंट का विचार बहुत powerful शक्तिशाली है। ऐतिहासिक गौरव को सेना में जगह देना सही दिशा में कदम है।
3000 रुपये और भत्ते के वादे अच्छे लगते हैं, लेकिन implementation क्रियान्वयन कैसे होगा? चाय बागानों में मजदूरों की हालत तो बहुत खराब है।
यहां सिर्फ विकास की बात नहीं, political calculation राजनीतिक गणित भी चल रहा है। राजबंशी मतदाता इन सीटों पर निर्णायक हैं।
उत्तर बंगाल 15 साल से neglected उपेक्षित रहा है। चाहे जो भी पार्टी हो, अब विकास की जरूरत है।
अशांति फैलाने वालों को उल्टा लटकाने की बात कहना क्या लोकतंत्र के साथ justice न्याय करना है?