चुनावी रण में सेना और एजेंसियों के इस्तेमाल पर भड़कीं ममता, केंद्र सरकार को घेरा
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर चुनावी रण में संवैधानिक institutions के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया है। खड़गपुर और कोलकाता में आयोजित चुनावी जनसभाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्रालय को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने पूछा कि अगर सेना का मुख्य duty देश की सीमाओं की रक्षा करना है, तो चुनावी बैठकों में उसे घसीटने का क्या logic है?
ममता ने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों की अति-सक्रियता चुनावी fairness को लगातार बिगाड़ रही है। उन्होंने अपनी उड़ान को रनवे पर 30 मिनट तक रोके जाने का हवाला दिया और कहा कि यह केवल टीएमसी नेताओं के campaigns में बाधा डालने की साजिश है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ भी ऐसा ही हुआ, जिससे साफ़ है कि यह कोई अकेला incident नहीं है।
उन्होंने जिला प्रशासन और पुलिस पर भाजपा के इशारे पर काम करने और टीएमसी कार्यकर्ताओं पर झूठे charges लगाने का भी आरोप लगाया। इसके साथ ही, उन्होंने दूरदर्शन और अन्य सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल सिर्फ राजनीतिक propaganda के लिए किए जाने पर चिंता जताई।
महिला आरक्षण विधेयक (2023) के कार्यान्वयन में देरी को लेकर उन्होंने केंद्र पर हमला तेज कर दिया। उन्होंने कहा कि अधिसूचना जारी न करना भाजपा की महिला-विरोधी mindset को उजागर करता है। उन्होंने बंगाल में पंचायतों में 50% आरक्षण और संसद में उच्च महिला representation के आंकड़े पेश किए और केंद्र से तुरंत कार्रवाई की मांग की।
अंत में, ममता ने कहा कि 2026 में दिल्ली में regime change तय है और तब ईडी, सीबीआई जैसी एजेंसियों का डर खत्म होगा। उन्होंने एनआरसी और सीएए के मुद्दे पर स्पष्ट किया कि बंगाल में किसी को भी बाहर नहीं निकाला जाएगा। उन्होंने भाजपा के 'अहंकार' को राज्य की जनता लोकतांत्रिक तरीके से defeat देगी।
ध्यान रहे, चुनाव में सेना की तैनाती नहीं, बल्कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की भूमिका है, जिसे लेकर राजनीतिक तनाव और भी गहरा है। यह अंतर संवैधानिक clarity के लिए अहम है।
सीमा की रक्षा करने वाली सेना को चुनावी मैदान में खींचना वाकई shameful शर्मनाक है। क्या यही लोकतंत्र है?
ममता जी को 30 मिनट रोकना अकेला मामला नहीं, हेमंत सोरेन के साथ भी ऐसा हुआ। यह pattern पैटर्न साफ है।
दिल्ली में बदलाव तय है? यह तो बहुत पहले से कहा जा रहा है, अब तक क्या हुआ? promises वादे तो हर कोई करता है।
बंगाल में महिलाओं का प्रतिनिधित्व सचमुच बढ़ा है। केंद्र को तुरंत implementation कार्यान्वयन शुरू करना चाहिए।
एजेंसियों का डर खत्म होगा? लेकिन अगर विपक्ष भी सत्ता में आए तो क्या वे खुद नहीं इस्तेमाल करेंगे? संशय बना रहता है।
अर्धसैनिक बलों की बात सही है, लेकिन जनता को यह अंतर समझ नहीं आता। मीडिया को clarity स्पष्टता देनी चाहिए।
एनआरसी-सीएए पर ममता का रुख स्पष्ट है। यह बंगाल की जनता के लिए reassurance आश्वासन है।