तृणमूल कांग्रेस ने आचार संहिता उल्लंघन का आरोप लगाते हुए हिमंत के खिलाफ निर्वाचन आयोग में शिकायत दर्ज कराई
तृणमूल कांग्रेस ने शनिवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के खिलाफ निर्वाचन आयोग में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उन्होंने पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान polarizing statements दिए हैं। पार्टी का कहना है कि शर्मा के भाषण public order को बाधित कर सकते हैं और चुनाव के माहौल में तनाव पैदा कर रहे हैं।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि 16 अप्रैल को कूचबिहार में एक जनसभा को संबोधित करते हुए शर्मा ने ऐसे inciting remarks कीं, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति defamatory थीं और चुनाव आचार संहिता (एमसीसी) के नियमों का clear violation है। पार्टी का तर्क है कि ऐसे बयान सामाजिक communal harmony पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।
तृणमूल ने यह भी दावा किया है कि शर्मा के बयान criminal intimidation के दायरे में आते हैं तथा भारतीय न्याय संहिता और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं। पार्टी ने इस बात पर भी जोर दिया है कि ये टिप्पणियां उच्चतम न्यायालय के उस guideline का भी उल्लंघन करती हैं, जिसमें चुनाव प्रचार में धर्म के उपयोग पर रोक लगाई गई है।
पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को दिए गए अभ्यावेदन में, तृणमूल ने मांग की है कि शर्मा के खिलाफ appropriate action की जाए। पार्टी का कहना है कि चुनावी माहौल में शांति और fair process बनाए रखने के लिए ऐसे बयानों पर तुरंत regulatory response जरूरी है।
चुनाव के वक्त हर पार्टी political pressure राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश करती है, लेकिन यहां तो बात ही कुछ और लेवल की है।
ममता बनर्जी के खिलाफ ऐसे personal attacks व्यक्तिगत हमले क्यों? क्या इससे वास्तव में लोगों के वोट बदलेंगे?
निर्वाचन आयोग को तुरंत investigate जांच शुरू करनी चाहिए। अगर ऐसे बयानों पर रोक नहीं लगी तो चुनावी नैतिकता ही खत्म हो जाएगी।
हर बार एक दूसरे पर शिकायतें, लेकिन actual impact वास्तविक प्रभाव क्या होता है? आयोग कुछ करता भी है या बस रिकॉर्ड बना लेता है?
धर्म को लेकर बयानबाजी खतरनाक है। ये सिर्फ एक election campaign चुनावी अभियान नहीं, सामाजिक peace शांति के लिए खतरा है।
क्या उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन करने वाले नेताओं के खिलाफ कभी strict penalty कड़ी सजा होगी?
एमसीसी का उल्लंघन तो हर जगह होता है, लेकिन जब कोई मुख्यमंत्री direct involvement सीधे शामिल हो तो बात गंभीर हो जाती है।