गैर जीवन बीमा प्रीमियम 3.36 लाख करोड़ तक पहुंचा, स्वास्थ्य बीमा में तेजी का बोलबाला
वित्त वर्ष 2026 में भारत के गैर जीवन बीमा क्षेत्र ने एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार किया है। कुल प्रीमियम सालाना आधार पर 9.3 प्रतिशत बढ़कर 3.36 लाख करोड़ रुपये के इतिहासिक स्तर पर पहुंच गया। यह growth मुख्य रूप से स्वास्थ्य बीमा के क्षेत्र में आई तेजी से संचालित हुई है, जिसने न केवल बाजार के आकार को बढ़ाया है बल्कि आम लोगों के लिए healthcare access को भी प्रभावित किया है।
विशेष रूप से, एकल स्वास्थ्य बीमा कंपनियों ने अभूतपूर्व surge दर्ज किया। उनका प्रीमियम एक साल में 519.4 प्रतिशत बढ़कर 45,865 करोड़ रुपये हो गया। इस expansion के पीछे जीएसटी दरों में बदलाव है, जिसके बाद स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर लगने वाला कर शून्य कर दिया गया। इससे affordability बढ़ा और लोगों ने इस क्षेत्र में अधिक निवेश किया।
इस वृद्धि के बावजूद, कुछ क्षेत्रों में चिंता की बात है। जनरल इंश्योरेंस कंपनियों का सकल प्रत्यक्ष प्रीमियम 8 प्रतिशत की दर से बढ़ा, जो कुल वृद्धि से कम है। इसके अलावा, crop insurance क्षेत्र में गिरावट आई है, जो किसानों के risk coverage के बारे में सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट किसानों की आर्थिक सुरक्षा को कमजोर कर सकती है।
श्रीराम जनरल इंश्योरेंस के चीफ अंडरराइटिंग ऑफिसर शशि कांत दहुजा ने स्पष्ट किया कि "main reason स्वास्थ्य बीमा में आई जबरदस्त तेज़ी रही है।" उन्होंने जोड़ा कि एकल स्वास्थ्य बीमा कंपनियां खुदरा बाजार में अपनी market share बढ़ा रही हैं। यह दर्शाता है कि लोग अब अपने स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति अधिक aware हो रहे हैं और proactive तरीके से सुरक्षा की तलाश कर रहे हैं।
हालांकि, वित्त वर्ष 2025 में यह growth rate केवल 6.2 प्रतिशत थी, जो दर्शाता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी अवधि की नीतियों में लेखांकन परिवर्तन ने इस स्थिरता को प्रभावित किया था। अब जब यह प्रभाव कम हुआ है, तो बाजार ने फिर से तेजी दर्ज की है। यह trend साबित करती है कि जनता के health priorities में गहरा बदलाव आया है।
जीएसटी में बदलाव के बाद स्वास्थ्य बीमा सस्ता हुआ, ये तो good news अच्छी खबर है। लेकिन क्या दावों के भुगतान में भी इतनी ही तेजी आई है? कंपनियों की claim settlement दावा निपटान दर पर नजर रखनी चाहिए।
519% की वृद्धि? ये तो unbelievable अविश्वसनीय लगता है। क्या ये आंकड़ा सही है? अगर हां, तो ये दिखाता है कि लोग अस्पतालों के rising cost बढ़ते खर्चे से बहुत डर रहे हैं।
यह shift बदलाव असली मायने रखता है। लोग अब निवारक देखभाल के लिए नहीं, बल्कि बड़े medical emergencies चिकित्सा आपात स्थितियों से बचने के लिए बीमा ले रहे हैं।
स्वास्थ्य बीमा में उछाल तो अच्छी बात है, लेकिन फसल बीमा में गिरावट क्यों? क्या सरकार किसानों के financial safety वित्तीय सुरक्षा को भूल रही है? ये एक serious concern गंभीर चिंता का विषय है।
मैंने पिछले साल अपने परिवार के लिए स्वास्थ्य बीमा अपग्रेड किया। डॉक्टर के बिल देखकर हैरान रह गई थी। अब लगता है मैंने right decision सही फैसला लिया था। मानसिक शांति के लिए ये जरूरी है।
क्या ये premium increase प्रीमियम वृद्धि आम आदमी के बजट पर दबाव डालेगी? सरकार को subsidy सब्सिडी या छूट देने पर विचार करना चाहिए, खासकर जोखिम वाले समूहों के लिए।