भारत आगे निकलेगा चीन से? मार्च तिमाही में 5% बढ़ी GDP, जानिए इंडिया को लेकर क्या है अनुमान
एशिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक, चीन ने मार्च तिमाही में GDP growth के मामले में 5% का आंकड़ा छुआ, जो बाजार के expectations से बेहतर है। नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स ऑफ चाइना के अनुसार, इस तिमाही में अर्थव्यवस्था का कुल आकार 33.4 ट्रिलियन युआन (लगभग 4.87 ट्रिलियन डॉलर) रहा। यह पिछली तिमाही की तुलना में 0.5 प्रतिशत अंक अधिक है, जो नई 15वीं पंचवर्षीय योजना की एक strong start को दर्शाता है।
लेकिन चीन facing challenges से घिरा हुआ है। घरेलू मांग कमजोर है, आबादी घट रही है, और रियल एस्टेट क्षेत्र गहरे संकट में है। पहली तिमाही में property investment में 11.2% की गिरावट आई, जो पिछले साल से भी अधिक है। इसके बावजूद, अर्थव्यवस्था ने आकर्षक growth rate बनाए रखी।
इसके विपरीत, भारत की economic momentum और अधिक तेज है। हालांकि मार्च 2026 की आधिकारिक जीडीपी रिपोर्ट 29 मई को जारी होगी, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस तिमाही में 6.5% की growth projection जताई है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि के 7.6% रहने का अनुमान है। पिछली तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था 7.8% की दर से बढ़ी थी, जो चीन की तुलना में काफी आगे है।
चीन ने 2026 के लिए अपने जीडीपी लक्ष्य को 5% तक सीमित कर दिया है, जो पहले 4.5% से 5% के बीच था। इसमें global uncertainty , अमेरिकी टैरिफ और घरेलू आर्थिक pressure जैसे कारक शामिल हैं। आईएमएफ ने चीन की वृद्धि का अनुमान घटाकर 4.4% कर दिया है। दूसरी ओर, RBI ने 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.9% रखा है, जबकि आईएमएफ ने इसे बढ़ाकर 6.5% कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संकट के बावजूद चीन की अर्थव्यवस्था कम प्रभावित रही, क्योंकि उसने विविध ऊर्जा स्रोतों को अपनाया है और तेल की खपत केवल 20% से कम है। भारत के विपरीत, जहां आर्थिक वृद्धि घरेलू खर्च पर आधारित है, वहां global conditions का प्रभाव गहरा पड़ता है।
चीन का रियल एस्टेट संकट तो बहुत बड़ा risk जोखिम है, लेकिन वे उसे कैसे संभाल रहे हैं?
भारत के लिए ये अनुमान तो अच्छे हैं, लेकिन क्या inflation महंगाई के दबाव में आरबीआई की नीति बदलेगी?
चीन ने अपने लक्ष्य को घटाया, जबकि भारत के लिए आईएमएफ ने अनुमान बढ़ाया। यही economic contrast आर्थिक अंतर दिख रहा है।
ऊर्जा स्वतंत्रता का फायदा चीन को मिल रहा है। भारत को long-term plan दीर्घकालिक योजना की जरूरत है।
क्या भारत अगले कुछ सालों में चीन को economic gap आर्थिक अंतर में पीछे छोड़ देगा? सवाल दिलचस्प है।
आईएमएफ के अनुमान बढ़े, लेकिन क्या यह real impact वास्तविक प्रभाव नौकरियों और आम आदमी तक पहुंचेगा?