चीन ने अरुणाचल प्रदेश के 23 स्थानों को दिए नए नाम, भारत ने जताई कड़ी आपत्ति
चीन ने भारत के अरुणाचल प्रदेश के 23 स्थानों को नए चीनी नाम देकर एक बार फिर कूटनयिक tension बढ़ा दिया है। भारत ने इस कदम को illegal और provocative बताते हुए कड़ी objection जताई, जिसके बाद चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने साफ कहा: जांगनान चीन का हिस्सा है, और वे भारत द्वारा illegally established किए गए so-called अरुणाचल प्रदेश को कभी मान्यता नहीं देंगे।
चीन का यह claim लंबे समय से चला आ रहा है, लेकिन 2017 से लगातार standardizing करने के बहाने वह इस क्षेत्र के स्थानों को चीनी नाम दे रहा है। 10 अप्रैल को जारी नई सूची ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास के strategic रूप से संवेदनशील स्थानों को शामिल किया है, जिससे security चिंता और बढ़ गई है। यह कदम न केवल नामांकन का मामला है, बल्कि एक संप्रभुता के प्रति लगातार चुनौती है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत चीन के किसी भी malicious attempt को categorically reject करता है। उन्होंने कहा कि चीन के false narrative और baseless story इस undeniable truth को नहीं बदल सकती कि ये क्षेत्र पहले भी भारत के थे, आज भी हैं और भविष्य में भी रहेंगे।
इस बीच, चीन ने अपने foreign policy के प्रति commitment जताई है और कहा कि वह चीन-भारत संबंधों को improve बनाने के लिए तैयार है। लेकिन ऐसे एकतरफा कदमों के बीच यह rhetoric खोखला लग रहा है। कूटनयिक dialogue के नाम पर क्षेत्रीय अखंडता को चुनौती देना द्विपक्षीय trust पर सीधा impact डालता है।
इस तरह की घटनाएं लगातार दोनों देशों के बीच तनाव को fuel देती हैं। जहां भारत शांति और स्थिरता की बात करता है, वहीं चीन के कदम एक strategic message की तरह लगते हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है: क्या चीन वास्तव में संबंध develop करना चाहता है, या बस pressure बनाए रखना चाहता है?
क्या चीन को लगता है कि बस rename नाम बदल देने से कोई इलाका उसका हो जाएगा? ये symbolic प्रतीकात्मक हरकतें खतरनाक हैं।
इतने सालों से हर साल नए नाम जारी करना... ये कोई accidental गलती नहीं, बल्कि clear strategy साफ रणनीति है।
चीन कहता है improve relations संबंध बेहतर करने की बात, लेकिन करता उल्टा। इसमें कोई credibility विश्वसनीयता नहीं दिखती।
अरुणाचल के लोगों की identity पहचान और culture संस्कृति पर भी इसका असर पड़ेगा। ये सिर्फ जमीन का मामला नहीं है।
क्या हमारी diplomatic response कूटनयिक प्रतिक्रिया काफी मजबूत है? केवल आपत्ति जताने से change बदलाव नहीं आएगा।
चीन को लगता है कि धीरे-धीरे जमीन पर तथ्य बना लेगा। हमें भी जवाब उसी तरह देना चाहिए।