जी5 पर ये 9 मूवीज़ और सीरीज़ देखे बिना आपका ओटीटी अधूरा है
ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर क्या देखें, यह सवाल आजकल हर किसी के दिमाग में चलता है। content की बाढ़ में खोजना मुश्किल हो गया है कि क्या वाकई देखने लायक है। अगर आपके पास ZEE5 का सब्सक्रिप्शन है या आप उसे ट्राई कर रहे हैं, तो यहां कुछ ऐसी फिल्में और सीरीज़ हैं जो न सिर्फ दिलचस्प हैं, बल्कि दर्शकों की भावनाओं पर भी छाप छोड़ती हैं। चाहे आप thriller पसंद करते हों या इमोशनल ड्रामा, इनमें से ज़्यादातर ने audience को झकझोर दिया है।
ZEE5 की ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्री सीरीज़ हनीमून से हत्या सच्ची घटनाओं पर आधारित है और उन शादियों की कहानियां बयान करती है जिनका अंत प्यार में नहीं, बल्कि हिंसा में हुआ। इसी तरह, मिसेज़ एक ऐसी महिला की कहानी है जो शादी के बाद अपनी identity खो बैठती है और फिर एक बिंदु पर टूट जाती है। सान्या मल्होत्रा की अभिनय performance ने इसे कई महिलाओं के लिए रिलेटेबल बना दिया।
कुछ फिल्में विवादों के घेरे में रही हैं, जैसे द केरल स्टोरी जिसे कुछ लोगों ने प्रोपेगेंडा कहा, लेकिन यह कथा एक नर्स के जीवन के बारे में है जो आतंकवादी बनने के रास्ते पर चल पड़ती है। इसी तरह, साली मोहब्बत में धोखे और मर्डर का ट्विस्ट है, जिसमें राधिका आप्टे ने एक ऐसी घरेलू महिला की भूमिका निभाई है जो अपने घर में घटी एक हत्या के बाद सच को उजागर करने लगती है।
इतिहासप्रेमियों के लिए सैम बहादुर एक बेहतरीन विकल्प है — यह फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ की जीवन गाथा दिखाती है, जिसमें विकी कौशल की portrayal की खूब तारीफ हुई। वहीं, उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक देशभक्ति से भरपूर फिल्म है, जिसने न केवल बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया बल्कि ओटीटी पर भी लोगों को बार-बार देखने पर मजबूर किया।
अगर आप इन्वेस्टिगेटिव drama पसंद करते हैं तो ग्यारह ग्यारह आईएमडीबी पर 8.1 रेटिंग के साथ एक मजबूत विकल्प है, जो अलग-अलग समय के घटनाक्रम को जोड़ती है। वहीं, नवाजुद्दीन सिद्दीकी की हड्डी एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति के बदले की कहानी है, जिसमें उनकी अभिनय skills ने दर्शकों को हैरान कर दिया। अंत में, लैला मजनूं एक ऐसी इमोशनल प्रेम कहानी है जो थिएटर में नहीं चली, लेकिन ओटीटी पर अपनी भावनात्मक गहराई के कारण लोगों के दिलों में जगह बना पाई।
उरी तो मैंने थिएटर में देखी थी, लेकिन ओटीटी पर फिर देखी तो वही pride गर्व महसूस हुआ।
मिसेज़ ने मुझे रो दिया। कितनी आम बातों के बीच छिपी एक महिला की struggle संघर्ष की कहानी।
हड्डी में नवाजुद्दीन का transformation रूपांतरण देखकर यकीन नहीं होता।
द केरल स्टोरी पर इतना विवाद, लेकिन कहानी खुद इतनी disturbing परेशान करने वाली है।
लैला मजनूं का ending अंत इतना दर्द भरा था कि मैं एक हफ्ते तक बात नहीं कर पाई।
ग्यारह ग्यारह का plot प्लॉट बहुत स्मार्ट था, लेकिन कहीं-कहीं धीमा लगा।