ईरान को मस्कट का दर्द याद है, अब वार्ता के पीछे कौन खींच रहा धागे?
मस्कट में हुई वार्ता विफल होने के बाद ईरान के लिए विश्वास का संकट पैदा हो गया है। पूर्व उच्चायुक्त वीणा सिकरी के अनुसार, ईरान अब अमेरिका और इजरायल के distrust से गुजर रहा है। फरवरी में ओमान की मेजबानी में हुई वार्ता में ईरान ने सभी शर्तें मान ली थीं, लेकिन फिर भी इजरायल ने हमला किया — जिसे अमेरिका का support मिला। यह घटना तेहरान में गहरा दर्द छोड़ गई।
अब इस्लामाबाद में चल रही वार्ता में ईरान ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की उपस्थिति की मांग की है। सिकरी के अनुसार, वेंस को युद्ध के खिलाफ stance नेता माना जाता है, जिससे तेहरान को थोड़ा trust है। लेकिन वास्तविकता यह है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच अभी तक सीधी बातचीत शुरू नहीं हुई है। यह अंतराल खतरे का संकेत हो सकता है।
पाकिस्तान की भूमिका पर सिकरी ने सीधे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के एक्स पोस्ट में 'ड्राफ्ट' टैग दिखना स्पष्ट संकेत है कि पाकिस्तान वही कर रहा है जो अमेरिका चाहता है। यह कदम pressure में लिया गया लगता है, न कि स्वतंत्र नीति के तहत। सिकरी ने पाकिस्तान की भूमिका को choreographed बताया।
इस बीच, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजी आवाजाही सुचारू रखने के बदले अपने फ्रीज फंड्स की वापसी की मांग की है। लेकिन अमेरिका ने इस demand को खारिज कर दिया है। यह बातचीत सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक bargaining का भी मुद्दा बन गई है। यदि लेबनान में इजरायल के हमले बंद नहीं होते, तो ईरान वार्ता छोड़ सकता है।
इस पूरे situation में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या असली शांति संभव है जब एक पक्ष को दूसरे पर भरोसा नहीं है? इजरायल की अपेक्षाएं पूरी न होने पर वह फिर हमला कर सकता है। यह चक्रव्यूह तब तक जारी रहेगा जब तक वास्तविक dialogue और पारदर्शिता की कमी बनी रहेगी।
ईरान के साथ इस तरह के सौदे लंबे समय तक नहीं चल सकते। trust भरोसा एक बार टूट जाए, तो फिर बहुत मुश्किल से बहाल होता है।
पाकिस्तान की भूमिका देखकर लगता है वो अमेरिका के pressure दबाव में नाच रहा है। 'ड्राफ्ट' टैग सचमुच बेहद बेवकूफी भरा था।
वीणा सिकरी ने सही कहा — इजरायल इन वार्ताओं में stake दांव नहीं लगाना चाहता। उसकी रणनीति अलग है।
अमेरिका शांति चाहता है, लेकिन इजरायल के हाथों बंधा है। यह contradiction विरोधाभास साफ नजर आ रहा है।
क्या वास्तव में वेंस peaceful शांतिप्रिय हैं या बस एक अलग छवि बना रहे हैं? इतिहास हमेशा एक जैसा दोहराता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने का threat खतरा पूरी दुनिया के लिए बड़ी बात है। तेल की आपूर्ति पर इसका असर पड़ेगा।