130 करोड़ की फ्लॉप फिल्म 'ओ रोमियो' ओटीटी पर बनी नंबर 1, शाहिद कपूर के तीव्र किरदार ने मचाई धूम

130 करोड़ के भारी बजट वाली एक्शन-थ्रिलर 'ओ रोमियो' ने सिनेमाघरों में box office पर निराशाजनक प्रदर्शन किया, लेकिन अब ओटीटी प्लेटफॉर्म पर इसने अपनी किस्मत पलट ली है। फिल्म की रिलीज़ के महज 24 घंटे के भीतर ही, यह प्राइम वीडियो की टॉप 10 सूची में शीर्ष स्थान पर कब्ज़ा करने में कामयाब रही। दर्शकों के बीच इसकी intense कहानी और शाहिद कपूर का गहरा अभिनय जोरदार reaction बटोर रहे हैं।

फिल्म का केंद्र शाहिद कपूर के किरदार उस्तरा पर है, जो एक खतरनाक गैंगस्टर है। कहानी उसके अपनों के betrayal और माफिया के जटिल नेटवर्क में फंसने की है। फिल्म में कई अप्रत्याशित twist हैं जो दर्शकों को हैरान कर देते हैं। विशाल भारद्वाज के निर्देशन में बनी यह फिल्म suspense और हाई-वोल्टेज ड्रामे से भरी है।

शाहिद कपूर को इस फिल्म के लिए 45 करोड़ रुपये मिले थे, और फिल्म की कुल लागत लगभग 130 करोड़ थी। भारत में इसने सिर्फ 59 करोड़ का कलेक्शन किया, जबकि विश्व स्तर पर कुल कमाई 92 करोड़ तक पहुंची। इसके बावजूद, ओटीटी पर रिलीज़ होते ही viewership में अचानक बढ़ोतरी ने सबको हैरान कर दिया।

फैंस ने फिल्म के dialogue , गानों और शाहिद के intense अभिनय की तारीफ की है। सोशल मीडिया पर कई डायलॉग्स वायरल हो गए हैं। नाना पाटेकर, फरीदा जलाल और तृप्ति डिमरी जैसे स्थापित कलाकारों की मजबूत उपस्थिति ने फिल्म को और depth दी है।

इस सफलता ने फिल्म उद्योग में ओटीटी के power पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। कई बार एक फिल्म सिनेमाघरों में असफल होती है, लेकिन डिजिटल माध्यम पर इसका true स्वाद दर्शकों को मिलता है। 'ओ रोमियो' अब एक कल्ट फेवरेट बनने की राह पर है।

टिप्पणियाँ 6

  • रोमियोवाला

    थिएटर में तो इसके बारे में कुछ नहीं सुना, लेकिन ओटीटी पर देखा तो लगा, ये फिल्म इग्नोर करने वाली नहीं थी।

  • फिल्मकू

    130 करोड़ का बजट और 92 करोड़ की कमाई? ये तो बड़ा loss है। ओटीटी पर सफलता से वापसी होगी क्या?

  • दिल्लीप्रेमी

    शाहिद के उस्तरा किरदार ने दिमाग में घर कर लिया। वो डायलॉग – 'मैं गैंगस्टर नहीं, बस धोखे का शिकार हूं' – powerful था।

  • बीटीएस

    फिल्म के गाने तो बचपन की तरह फेवरेट हो गए। लेकिन क्या ओटीटी की सफलता बॉक्स ऑफिस failure को मिटा सकती है?

  • विशालप्रेमी

    विशाल भारद्वाज की कहानी कहने की शैली ही कुछ और है। फिल्म ने emotional जुड़ाव बना लिया।

  • स्ट्रीमचक्र

    अब तो साफ है कि कुछ फिल्मों को थिएटर की तुलना में home पर देखना बेहतर होता है।