लोकसभा में अधिक वोट मिलने के बाद भी महिला आरक्षण बिल क्यों असफल रहा, आगे क्या रास्ता?
लोकसभा में अधिक वोट मिलने के बाद भी महिला आरक्षण विधेयक क्यों असफल रहा, और आगे का रास्ता क्या है? सरकार की ओर से लाया गया 131वां संवैधानिक संशोधन विधेयक, जो महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में था, एक ऐतिहासिक अवसर के बावजूद गिर गया। हैरानी की बात यह है कि विधेयक को विपक्ष के मुकाबले ज्यादा votes मिले, फिर भी यह पारित नहीं हो सका।
कारण था constitutional प्रक्रिया की कठोरता। संवैधानिक संशोधन के लिए दो शर्तें हैं: सदन के कुल सदस्यों में साधारण बहुमत और उपस्थित सदस्यों में दो-तिहाई बहुमत। मतदान में 528 सदस्य उपस्थित थे। विधेयक को 298 support में और 230 विरोध में वोट मिले। 352 वोटों के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत से महज 54 वोट कम थे। इस तकनीकी कमी ने विधेयक को रोक दिया।
विवाद का केंद्र था delimitation का मुद्दा। सरकार चाहती थी कि लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 की जाएं, ताकि आरक्षण के लिए नई सीटें बन सकें। इसके लिए delimitation जरूरी था। विपक्ष का तर्क था कि आरक्षण वर्तमान सीटों पर ही लागू किया जाना चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार political map को बदलने की कोशिश कर रही है, जो महिला सशक्तिकरण से अलग है।
गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब दिया कि विपक्ष obstruction डाल रहा है, और आने वाले चुनावों में उसे महिलाओं के anger का सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस ने इसे political tactic बताया। दोनों पक्षों के बीच नीतिगत टकराव साफ दिखा।
अब आगे का रास्ता अनिश्चित है। मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार परिसीमन और सीट वृद्धि से जुड़े अन्य दो विधेयक आगे नहीं बढ़ाएगी, क्योंकि वे महिला आरक्षण विधेयक से linked थे। इसका मतलब है कि 2029 के चुनावों तक आरक्षण की implementation की उम्मीद धुंधली हो गई है। जहां सरकार विपक्ष को blame ठहरा रही है, वहीं विपक्ष सरकार की process पर सवाल उठा रहा है।
वोट तो मिले, लेकिन constitutional rule संवैधानिक नियम के कारण फेल हुआ। ये पहली बार नहीं है जब तकनीकी बाधा ने बड़े reform सुधार को रोका।
अगर सरकार सच में आरक्षण चाहती थी, तो मौजूदा सीटों पर क्यों नहीं लागू करने का plan प्लान बनाया?
महिलाओं के empowerment सशक्तिकरण का मुद्दा राजनीतिक बहाने में फंस गया। अब कौन सच में चाहता है कि ये बिल पास हो?
54 वोट की कमी? ये कोई छोटी बात नहीं है। इसका मतलब है कि सरकार को support समर्थन नहीं मिला, चाहे वो विपक्ष के मुकाबले ज्यादा था।
अमित शाह का warning चेतावनी देना ठीक है, लेकिन क्या वाकई महिलाएं इसी विधेयक के लिए विपक्ष के खिलाफ वोट करेंगी?
सीट बढ़ाने की बात से public trust जन भरोसा डगमगाया। लोगों को लगा कि ये सिर्फ नक्शा बदलने का excuse बहाना है।