होर्मुज में नाकेबंदी: ट्रंप के सामने अंतरराष्ट्रीय विरोध, ब्रिटेन ने कहा—यह हमारा युद्ध नहीं
मध्य पूर्व में tension एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ होर्मुज जलडमरूमध्य में naval blockade की घोषणा की है, जो आज शाम 7:30 बजे से लागू हो जाएगी। अमेरिकी सेना सभी उन जहाजों को रोकेगी और तलाशी लेगी जो ईरानी बंदरगाहों की ओर जा रहे हैं। यह कदम ईरान के साथ बातचीत के असफल होने के बाद उठाया गया है, जिससे diplomacy पर भारी दबाव पड़ा है।
इस घोषणा के बाद ईरान ने सख्त चेतावनी दी है। उसकी सशस्त्र सेना का कहना है कि अगर उसके बंदरगाहों की सुरक्षा खतरे में पड़ी, तो पूरे क्षेत्र के सभी बंदरगाह unsafe रहेंगे। ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को 'समुद्री डकैती' कहा है और कहा है कि या तो सभी के लिए सुरक्षा होगी, या किसी के लिए नहीं। इस बयान से स्पष्ट है कि वह response देने पर तुला हुआ है।
वैश्विक स्तर पर प्रतिक्रिया भी तेजी से आई है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा है कि यह 'हमारा युद्ध नहीं है' और ब्रिटेन इसमें नहीं फंसेगा। उन्होंने वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहे प्रभाव को देखते हुए होर्मुज को खुला रखने की जरूरत पर जोर दिया। उनके इस stance पर साफ रुख ने ट्रंप की योजना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलगाव में धकेल दिया है।
इसी तरह, ऑस्ट्रेलिया के पीएम एंथनी अल्बनीज ने भी कहा कि उन्हें नाकेबंदी में शामिल होने का कोई अनुरोध नहीं मिला है। वे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के सम्मान के पक्ष में हैं। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने बातचीत के जरिए समाधान की उम्मीद जताई और युद्धविराम को 45 से 60 दिनों के लिए बढ़ाने का सुझाव दिया। यह दर्शाता है कि कूटनीति अभी पूरी तरह से बंद नहीं हुई है।
लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस के अनुसार, ट्रंप की चेतावनी के बाद होर्मुज स्ट्रेट में सभी जहाजी traffic रुक गई है। दो जहाज जो बाहर निकल रहे थे, उन्हें वापस लौटना पड़ा। यह क्षेत्र दुनिया के oil supply का सबसे संवेदनशील रास्ता है। यदि यह नाकेबंदी लंबित रहती है, तो ऊर्जा कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं और आम लोगों के बिजली-गैस के बिल पर सीधा असर पड़ेगा।
इस संकट ने दुनिया को एक बार फिर याद दिलाया है कि क्षेत्रीय तनाव का global impact क्या हो सकता है। एक तरफ अमेरिका का दबाव बनाने का प्रयास है, तो दूसरी तरफ ब्रिटेन और अन्य सहयोगियों का शांति बनाए रखने का दृष्टिकोण। इस बीच, आम नागरिक की चिंता बढ़ रही है कि क्या वे इस conflict के बीच फंस जाएंगे, जिसका उनके जीवन से कोई सीधा लेना-देना नहीं है।
जब तक तेल बहता रहेगा, तब तक ये तनाव भी बना रहेगा। oil supply तेल आपूर्ति पर नजर रखना हर देश के लिए जरूरी है।
ब्रिटेन का यह stance मुद्दा सही है। यह उनका युद्ध नहीं है, फिर भी घसीटे जाने का खतरा हमेशा रहता है।
क्या अमेरिका वाकई सुरक्षा के लिए कर रहा है, या बस pressure दबाव बनाना चाहता है? इसका जवाब तो इतिहास देगा।
होर्मुज स्ट्रेट में ट्रैफिक रुकने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर तुरंत असर दिखेगा। हमारे बिजली के बिल भी बढ़ेंगे।
ईरान का 'सभी के लिए या किसी के लिए नहीं' वाला बयान डरावना है। ये tension तनाव कहां तक जाएगा?
कूटनीति अभी जिंदा है। तुर्की का सुझाव दिलचस्प है। diplomacy कूटनीति से हल निकलना चाहिए, नाकेबंदी से नहीं।