ब्रिटिश पीएम स्टार्मर ने ट्रंप की होर्मुज नाकेबंदी योजना को दिया झटका, कहा- नहीं देंगे सैन्य समर्थन
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अमेरिका के blockade plan ने को लेकर एक स्पष्ट position अपनाई है और कहा है कि ब्रिटेन होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी military action में शामिल नहीं होगा। सोमवार को बीबीसी रेडियो 5 को दिए interview में उन्होंने कहा कि चाहे कितना भी pressure बनाया जाए, ब्रिटेन न तो ईरान के खिलाफ युद्ध में कूदेगा और न ही नाकेबंदी में सहयोग करेगा।
स्टार्मर ने स्पष्ट किया कि ब्रिटेन blockade का समर्थन नहीं करता, लेकिन जलडमरूमध्य को fully open रखना जरूरी मानता है। उन्होंने कहा, "मेरी नजर में, यह बहुत जरूरी है कि हम इस जलडमरूमध्य को खुलवाएं और पूरी तरह से खुलवाएं।" उन्होंने बताया कि ब्रिटेन के पास mine-clearing ship मौजूद हैं और उनका उद्देश्य इस मार्ग को सुरक्षित बनाना है, लेकिन वे किसी आक्रामक military operation का हिस्सा नहीं बनेंगे।
इसके विपरीत, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने रविवार को warning जारी की कि अमेरिकी सेना उन सभी जहाजों को रोक देगी जिन्होंने ईरान को शुल्क अदा किया हो। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह naval blockade सोमवार सुबह शुरू हो सकती है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जो कोई भी गैर-कानूनी तरीके से शुल्क देगा, उसे safe passage नहीं मिलेगा।
ट्रंप ने आगे कहा कि कोई भी ईरानी जो अमेरिकी या किसी peaceful ship पर गोली चलाएगा, उसे तुरंत destroyed कर दिया जाएगा। उनके इस threat भरे बयान ने क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। वहीं, ब्रिटेन का stance दर्शाता है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून और जल मार्गों की स्वतंत्रता को बनाए रखना चाहता है, भले ही इससे अमेरिका के साथ tension बढ़े।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। इस मार्ग से प्रतिदिन करीब 20 मिलियन बैरल तेल गुजरता है। इसलिए, कोई भी disruption वैश्विक energy market पर गहरा impact डाल सकती है। ब्रिटेन के इस decision ने न केवल द्विपक्षीय संबंधों में तनाव पैदा किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि पश्चिमी allies ईरान के मामले में एकजुट नहीं हैं।
अमेरिका की नाकेबंदी की strategy रणनीति खतरनाक है। यह न केवल तेल की आपूर्ति को प्रभावित करेगी, बल्कि क्षेत्र में युद्ध की आग भी भड़का सकती है।
स्टार्मर सही कह रहे हैं। ब्रिटेन को military escalation सैन्य बढ़ोतरी में नहीं कूदना चाहिए। हमें शांति और कूटनीति पर भरोसा करना चाहिए।
लेकिन क्या ब्रिटेन वाकई स्वतंत्र फैसला ले सकता है? क्या यह सिर्फ एक political statement राजनीतिक बयान नहीं है ताकि चुनाव के समय घरेलू तस्वीर अच्छी लगे?
होर्मुज के बंद होने का मतलब है तेल की कीमतों में भारी उछाल। भारत जैसे आयातक देशों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा।
ब्रिटेन के mine-clearing ship बारूदी सुरंगें हटाने वाले जहाज वाकई अहम हैं। यह उनका योगदान है, लेकिन बिना लड़ाई के। बहुत समझदारी भरा move कदम।
ट्रंप की धमकियाँ सिर्फ दिखावे के लिए हैं। क्या वाकई वह किसी जहाज को खुले समुद्र में जब्त कर पाएंगे? अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहता है?