विप्रो ने 19% प्रीमियम पर ₹15,000 करोड़ के शेयर बायबैक की घोषणा की
आईटी सेवा दिग्गज विप्रो ने निवेशकों के लिए एक बड़ी announcement की है: कंपनी ₹15,000 करोड़ के शेयर buyback का ऐलान कर चुकी है। इस योजना के तहत, कंपनी प्रति शेयर ₹250 की दर से शेयर वापस खरीदेगी, जो बाजार में पिछले दिन के बंद भाव से 19% अधिक है। यह move न केवल निवेशकों के भरोसे को बढ़ाएगा, बल्कि कंपनी की वित्तीय strength को भी दर्शाता है।
विप्रो कुल 60 करोड़ इक्विटी शेयर वापस खरीदेगी, जो कंपनी की कुल भुगतानकृत इक्विटी पूंजी का लगभग 5.7% है। यह decision ऐसे समय आया है जब तीन साल में कंपनी ने पहली बार ऐसी initiative की है। इससे पहले, 2023 में विप्रो ने ₹12,000 करोड़ के शेयर बायबैक किए थे, जो निवेशकों के बीच सकारात्मक reaction लाया था।
विश्लेषकों का मानना है कि यह strategy कंपनी के शेयर के value में सुधार कर सकती है। जब कंपनी अपने शेयर खरीदती है, तो बाजार में उपलब्ध शेयरों की संख्या कम हो जाती है, जिससे प्रति शेयर आय में वृद्धि हो सकती है। यह एक common बाजार tactic है जिससे कंपनियां अपने शेयरधारकों को benefit पहुंचाती हैं।
इस बायबैक के माध्यम से, विप्रो अपने उच्च नकदी भंडार का उपयोग कर रही है। यह signal देता है कि कंपनी को अपने भविष्य की growth के लिए अतिरिक्त निवेश की अपेक्षाकृत कम आवश्यकता है, और वह नकदी को शेयरधारकों के पास वापस लौटा रही है। यह approach लंबे समय से स्थिर वित्तीय performance वाली कंपनियों में आम है।
19% प्रीमियम पर खरीदारी? यह तो सीधा bonus बोनस है छोटे निवेशकों के लिए।
2023 में ₹12,000 करोड़, अब ₹15,000 करोड़ — यह trend प्रवृत्ति दिखाती है कि कंपनी नकदी बहुत जमा कर चुकी है।
क्या इसका मतलब है कि विप्रो के पास new project नया प्रोजेक्ट लॉन्च करने के लिए कोई मजबूत योजना नहीं है?
शेयर बायबैक हमेशा positive सकारात्मक संकेत देता है। दिखाता है कि कंपनी अपने शेयर को कम मूल्यांकित मानती है।
प्रति शेयर ₹250 की पेशकश बाजार भाव से ऊपर है, यह attractive आकर्षक है। लेकिन क्या छोटे शेयरधारकों को वास्तविक benefit लाभ मिलेगा?
कंपनी ने तीन साल बाद कदम उठाया, लेकिन अब बार-बार बायबैक की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। यह short-term अल्पकालिक gain लाभ है, मूलभूत strength मजबूती नहीं।