झारखंड में जन्म से ही स्वास्थ्य सुरक्षा: मुख्यमंत्री अबुआ योजना के तहत जल्द जारी होगा हेल्थ कार्ड
झारखंड सरकार ने राज्य के हर बच्चे को जन्म से ही health security से जोड़ने की ऐतिहासिक घोषणा की है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर घोषणा की कि new plan के तहत जल्द ही मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत हेल्थ कार्ड जारी किए जाएंगे। इसके तहत बच्चों को जन्म के साथ ही एक health card मिलेगा, जिसके जरिए उनके इलाज की financial responsibility सरकार उठाएगी।
इस योजना के तहत, पात्र परिवारों को हर साल 5 लाख रुपये तक का cashless treatment मिलेगा। गंभीर बीमारियों में यह राशि बढ़ाकर 10 लाख रुपये तक की जाएगी। इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर air ambulance और रेफरल सुविधा भी उपलब्ध होगी। सरकार का मानना है कि यह कदम गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर चिकित्सा financial pressure कम करेगा।
स्वास्थ्य मंत्री ने future roadmap भी साझा की। राज्य में 247 नई हाईटेक एम्बुलेंस शुरू की जाएंगी, और दो नए कॉल सेंटर संताल परगना और रांची में स्थापित किए जाएंगे। सहिया कर्मियों को digital support देने के लिए उन्हें टैबलेट उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे better monitoring कर सकें।
इसके अलावा, डॉ. अंसारी ने mental health पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बच्चों में मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से mental illness बढ़ रही हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों के मोबाइल उपयोग पर control रखें। उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण और public awareness को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम के दौरान ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण को भी बढ़ावा दिया गया, जिसमें मनुष्य, पशु और पर्यावरण के स्वास्थ्य को एक साथ देखा जाएगा। यह दृष्टिकोण भविष्य की health policy का एक अहम हिस्सा बनेगा। राज्य सरकार ने लोगों को जल्दी और बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए new steps उठाए हैं, ताकि हर नागरिक को timely treatment मिल सके।
5 लाख तक का कैशलेस इलाज? यह तो बहुत बड़ी relief राहत होगी। अब कोई बीमारी होने पर पैसों के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।
अच्छा हुआ कि मोबाइल के दुष्प्रभाव पर भी चर्चा हुई। आजकल बच्चे घंटों फोन पर रहते हैं। mental health मानसिक स्वास्थ्य पर इसका बहुत बुरा असर पड़ रहा है।
सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि ये सुविधाएं गांवों तक पहुंचें। शहर में तो हर चीज मिल जाती है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में access पहुंच हमेशा समस्या रहती है।
हेल्थ कार्ड जन्म से जोड़ने का विचार तो बहुत बढ़िया है। लेकिन क्या इसे लागू करने में कोई delay देरी नहीं होगी? पहले भी कई योजनाएं धीमी गति से चलीं।
‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण वाकई आवश्यक है। पशु रोगों का मनुष्यों पर direct impact प्रत्यक्ष प्रभाव होता है। इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
247 एम्बुलेंस और कॉल सेंटर अच्छा कदम है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ये सभी जगहों पर effective प्रभावी ढंग से काम करेंगे? बुनियादी ढांचा मजबूत होना चाहिए।