विश्व स्वास्थ्य दिवस: धनबाद में बढ़ रहे बीपी-शुगर और कुपोषण, जीवनशैली बनी खतरा
विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर धनबाद में स्वास्थ्य की हालत ने एक चेतावनी का रूप ले लिया है। modern lifestyle और बदलते खानपान ने न सिर्फ वयस्कों को ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी बीमारियों में धकेला है, बल्कि बच्चों का स्वास्थ्य भी खतरे में है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले की 12 प्रतिशत आबादी अब BP-sugar से ग्रस्त है, जो कुल 32 लाख की आबादी में लगभग 4 लाख लोगों को छूता है।
एसएनएमएमसीएच के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. यूके ओझा के मुताबिक, छोटे शहरों में भी non-communicable diseases तेजी से बढ़ रहे हैं। physical labor में कमी, unbalanced diet और stressful life इसके मुख्य कारण हैं। यह सिर्फ शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है — ग्रामीण और कोलियरी इलाकों में 32 प्रतिशत बच्चे malnourished पाए गए हैं, जिन्हें अब सरकारी केंद्रों में उपचार दिया जा रहा है।
इसके विपरीत, शहरी बच्चे जंक फूड और पैकेज्ड खाने की वजह से obesity की चपेट में आ रहे हैं। शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अविनाश कुमार कहते हैं कि junk-fast food और high-carbohydrate पदार्थों के सेवन से बच्चों में मेटाबॉलिक समस्याएं बढ़ रही हैं। इन्हें स्वस्थ आहार और नियमित गतिविधि की आवश्यकता है।
सिविल सर्जन डॉ. आलोक विश्वकर्मा के अनुसार, सरकारी अस्पतालों में regular screening की व्यवस्था की गई है। सदर अस्पताल में खुला आदर्श कुपोषण उपचार केंद्र निशुल्क सेवा दे रहा है। लेकिन जनता के बीच awareness और preventive care का अभाव अभी भी बड़ी चुनौती है।
जनता को सलाह दी गई है कि वे resistance क्षमता बढ़ाने के लिए अंकुरित अनाज और विटामिन सी युक्त फल लें। छोटी तकलीफ पर भी teleconsultation लेनी चाहिए। सिरदर्द, सांस फूलना या चक्कर आना high BP के संकेत हो सकते हैं। ग्लूकोमीटर से नियमित sugar check और दवाओं का पालन अनिवार्य है।
32 फीसदी बच्चे कुपोषित? ये आंकड़ा डरावना है। malnutrition कुपोषण को रोकना तो सरकारी जिम्मेदारी है।
हमारे घर के बच्चे रोज packaged food पैकेज्ड खाना खाते हैं। अब समझ आया कि यही उनके weight gain वजन बढ़ने का कारण है।
जंक फूड के बजाय home-cooked meals घर का खाना देना चाहिए। बच्चों के भविष्य के लिए यही सबसे बड़ी preventive step रोकथाम है।
12 फीसदी बीपी-शुगर? ये तो हर दूसरे परिवार में है। lifestyle diseases जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां अब महामारी बन गई हैं।
मैंने पिछले साल जंक फूड छोड़ा। अब daily walk रोज सैर करता हूं। energy level ऊर्जा स्तर बिल्कुल बदल गया है।
क्या सरकार वाकई इन public health जन स्वास्थ्य समस्याओं पर ध्यान दे रही है, या सिर्फ awareness campaign जागरूकता अभियान चलाकर संतुष्ट हो रही है?