रायपुर में एचपीवी वैक्सीन की शुरुआत: किशोरियों के लिए कैंसर से बचाव का नया सहारा?
कैंसर से लड़ाई में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर अब एक नए मोर्चे पर उतर चुकी है। यहाँ की adolescent को अब वैक्सीन लगाई जा रही है, जो cervical के कैंसर से बचाव कर सकती है। स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल की मौजूदगी में गुरुवार को इस अभियान की शुरुआत हुई। यह टीकाकरण अब तक के सबसे गंभीर disease लक्ष्यों में से एक है – जहाँ बचाव को इलाज से ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है।
टीकाकरण अभियान की focus केवल 14 से 15 साल की लड़कियों पर है, हालाँकि केंद्र सरकार की गाइडलाइन 9 से 14 साल की उम्र वाली girls तक को कवर करती है। यह अंतर delay और अपूर्ण coverage के सवाल खड़े कर रहा है। वैक्सीन human पेपिलोमा वायरस (एचपीवी) के खिलाफ है, जो गर्भाशय ग्रीवा कैंसर का मुख्य cause है।
ग्रामीण इलाकों में यह infection ज्यादा फैला है। डॉक्टरों का कहना है कि कम उम्र में marriage और hygiene के अभाव के कारण जोखिम बढ़ जाता है। और चूंकि इस बीमारी के early चरण में लक्षण नहीं दिखते, इसलिए मरीज अक्सर advanced अवस्था तक पहुंच जाते हैं। वैक्सीन की प्रभावशीलता 95 फीसदी तक बताई गई है।
टीके अब प्रदेश के सभी medical कॉलेजों, जिला अस्पतालों और सीएचसी में उपलब्ध हैं। private अस्पतालों में एक खुराक की कीमत लगभग 4,000 रुपए है, जो गरीब families के लिए बोझ है। इसलिए मुफ्त टीकाकरण की यह पहल access को लोकतांत्रिक बनाने का कदम है। पीएचसी में भी जल्द वैक्सीन पहुंचाई जाएगी।
प्रदेश में लगभग 3.5 लाख किशोरियों को एचपीवी वैक्सीन लगाई जानी है। लेकिन उम्र सीमा को लेकर criticism जारी है। क्या 14 साल से छोटी लड़कियां इस सुरक्षा से वंचित रह जाएंगी? जबकि वैज्ञानिक तौर पर वैक्सीन 9 से 14 साल के बीच सबसे ज्यादा effective होती है। प्रधानमंत्री मोदी ने 28 फरवरी को अजमेर में इस अभियान की शुरुआत की थी, लेकिन रायपुर में यह शुरुआत देर से हुई।
अगर वैक्सीन effective प्रभावी है तो 9 साल से लेकर 14 साल तक की सभी लड़कियों को क्यों नहीं लगाई जा रही?
हमारे गांव में तो लड़कियां अभी तक इस बीमारी के बारे में नहीं जानतीं। जागरूकता की कमी है।
एचपीवी वैक्सीन एक ब्रेकथ्रू है। लेकिन उम्र सीमा सख्त होनी चाहिए।
मेरी बेटी 13 की है। क्या वो eligible पात्र है? कहीं न लग जाए तो बहुत दुख होगा।
टीके की कीमत 4000 रुपए? यह तो एक मजदूर की एक महीने की कमाई है।
अजमेर में शुरुआत हुई, लेकिन रायपुर को देरी से क्यों? क्या यह priority प्राथमिकता का मामला है?
सरकारी अस्पतालों में मुफ्त टीका मिल रहा है, लेकिन क्या सभी जगह उपलब्ध होगा? access पहुंच हमेशा सवाल है।
मेरी पोती को लग गई। अब मुझे लगता है कि उसे एक ढाल मिल गई है।