कैंसर मरीजों के लिए बड़ी उम्मीद! mRNA वैक्सीन से जीती पैंक्रियाटिक कैंसर की जंग, 6 साल तक जिंदा रहे मरीज
पैंक्रियाटिक कैंसर, जिसे the disease के रूप में अक्सर सबसे dangerous माना जाता है, में अब एक बड़ी उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है। Memorial Sloan Kettering Cancer Center के वैज्ञानिकों ने a personalized mRNA वैक्सीन विकसित की है, जिसने कुछ मरीजों को छह साल तक कैंसर-मुक्त जीवन जीने में मदद की है। यह उपलब्धि उन लाखों मरीजों के लिए a major खुशखबरी है, जिनके लिए पहले बचने के chances लगभग नगण्य थे।
72 वर्षीय डोना गुस्टाफसन को स्टेज-2 पैंक्रियाटिक कैंसर का पता चलने के बाद सर्जरी की गई। उसके बाद उन्होंने इस नए टीके के clinical trial में भाग लिया। आज, कई साल बाद भी वे कैंसर-मुक्त हैं। यह मामला दिखाता है कि timely उपचार और नवीनतम technology कितना अंतर ला सकती है।
इस वैक्सीन का आधार immunotherapy है, जो शरीर की प्राकृतिक immune system को कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ activate करती है। वैज्ञानिक पहले ट्यूमर के sample में उपस्थित आनुवंशिक mutations की पहचान करते हैं, और फिर उसी के अनुसार एक विशिष्ट mRNA वैक्सीन तैयार करते हैं। यह वैक्सीन शरीर को सिखाती है कि कैंसर कोशिकाओं को कैसे destroy करना है।
Nature जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, लगभग 50% मरीजों में एक मजबूत immune response देखी गई। जो मरीज प्रतिक्रिया दिखा पाए, उनमें से 90% लंबे survival के साथ जीवित रहे। कई मरीज 6 साल बाद भी कैंसर-मुक्त हैं। किलर टी-सेल्स और हेल्पर टी-सेल्स दोनों को सक्रिय करने से कैंसर की वापसी भी रुकती है।
हालांकि यह तकनीक अभी early stage में है, लेकिन परिणाम बेहद उम्मीद भरे हैं। BioNTech और Genentech जैसी कंपनियां अब larger trials चला रही हैं। यह दृष्टिकोण भविष्य में अन्य कैंसर प्रकारों के इलाज में भी significant भूमिका निभा सकता है। फिलहाल, डॉक्टरों की सलाह के बिना कोई भी treatment नहीं अपनाया जाना चाहिए।
अगर यह वैक्सीन सच में effective प्रभावी है, तो क्या यह जल्दी उपलब्ध होगी? मेरे परिवार में किसी को भी यह बीमारी है।
mRNA तकनीक वाकई क्रांतिकारी है। कोविड के बाद यह कैंसर में भी काम आ रही है।
यह अच्छी खबर है, लेकिन clinical trials क्लिनिकल ट्रायल अभी जारी हैं। इसे आम इलाज बनने में साल लग सकते हैं।
इतनी बड़ी खबर है, लेकिन हमें false hope झूठी उम्मीद नहीं पालनी चाहिए। अभी यह सीमित मरीजों पर ही काम कर रहा है।
क्या इस वैक्सीन की cost कीमत आम आदमी के बजट में होगी? यही सबसे बड़ा सवाल है।
मैंने अपने पति को पैंक्रियाटिक कैंसर से खो दिया। अगर यह वैक्सीन पहले आ जाती, तो शायद वो अब भी होते। इतना दर्दनाक है।