6 खिलाड़ी जो कप्तानी की वजह से बचे हैं, अभी तक टीम से ड्रॉप हो चुके होते
इंडियन प्रीमियर लीग का 19वां सीजन अब अपने midway के करीब पहुँच चुका है, और अब तक के मैचों में कई टीमों की सफलता में उनके कप्तानों के उल्लेखनीय प्रदर्शन का बड़ा योगदान रहा है। मगर दूसरी ओर, कुछ कप्तान ऐसे भी हैं जिनके बल्ले और गेंद दोनों ने अब तक उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। फिर भी, उनकी कप्तानी की भूमिका ने उन्हें टीम से dropped होने से बचा रखा है।
लखनऊ सुपर जायंट्स के कप्तान ऋषभ पंत, जो आईपीएल इतिहास में सबसे महंगे खिलाड़ी हैं, ने इस सीजन 6 पारियों में सिर्फ 147 रन बनाए हैं। उनके अलावा एक नाबाद 68 रन की पारी के, बाकी प्रदर्शन below-par रहा है। टीम भी 2 जीत और 4 हार के साथ points table में नौवें स्थान पर है। चेन्नई सुपर किंग्स के ऋतुराज गायकवाड़ भी कप्तानी के बोझ तले दबे नजर आए हैं — 6 पारियों में सिर्फ 82 रन और 13.66 की औसत उनके लिए बड़ी चिंता की बात है।
मुंबई इंडियंस के हार्दिक पंड्या ने न तो बल्ले से और न ही गेंद से अपना प्रभाव दिखाया है। 5 मैचों में 96 रन और महज 3 विकेट उनके खराब form को दर्शाते हैं, जिसका असर MI के समग्र प्रदर्शन पर साफ दिख रहा है। राजस्थान रॉयल्स के रियान पराग की कप्तानी के बावजूद उनका व्यक्तिगत योगदान अब तक नगण्य रहा है — 61 रन और 2 विकेट। उनकी टीम चौथे स्थान पर है, लेकिन वह credit मुख्य रूप से यशस्वी जायसवाल और जोफ्रा आर्चर जैसे खिलाड़ियों को जाता है।
दिल्ली कैपिटल्स के अक्षर पटेल ने भी न तो बल्लेबाजी में छाप छोड़ी है (31 रन) और न ही गेंदबाजी में ज्यादा impact दिखाया है (6 विकेट)। कोलकाता नाइट राइडर्स के अजिंक्य रहाणे ने 7 पारियों में 152 रन बनाए हैं, लेकिन दो बार शून्य पर आउट होने ने टीम की शुरुआत को कमजोर किया है। साथ ही, उनके tactical decisions को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
इन सभी कप्तानों के लिए आगे के मैच निर्णायक होंगे। अगर वे अपने personal performance में सुधार नहीं ला पाए, तो कप्तानी का सहारा भी उन्हें लंबे समय तक नहीं बचा पाएगा। फैंस और एक्सपर्ट्स दोनों की नजर अब उनके अगले कुछ मैचों पर होगी।
पंत को तो सिर्फ कप्तानी के लिए बचाया जा रहा है। उनके batting form बल्लेबाजी फॉर्म में सुधार के बिना LSG आगे नहीं बढ़ पाएगी।
हार्दिक पंड्या पर ज्यादा pressure दबाव है। जब टीम खराब प्रदर्शन कर रही हो, तो कप्तान सबसे आगे निशाने पर आता है।
रियान पराग की बात करो या रहाणे — दोनों ने टीम को strong start मजबूत शुरुआत नहीं दी। ओपनिंग तो कप्तानों का काम होता है।
अक्षर पटेल को कप्तान बनाना एक risky move जोखिम भरा कदम लग रहा है। अगर वह खुद नहीं चमके, तो टीम कैसे जीतेगी?
CSK फैंस ने गायकवाड़ को सपोर्ट करना जारी रखा है, लेकिन उनके consistency लगातार असफलता से धैर्य घट रहा है।
क्या आईपीएल में कप्तानी अब सिर्फ legacy विरासत और नाम के आधार पर होती है? प्रदर्शन का कोई मायने नहीं रह गया?