धूमकेतु ने टूटी पूंछ के बाद फिर बनाई नई पूंछ, वैज्ञानिक हैरान
क्या आपने कभी सोचा था कि एक धूमकेतु tail खोने के बाद उसे फिर से पा सकता है? Comet C/2023 P1 (Nishimura) ने ऐसा ही कुछ कर दिखाया है। सूर्य की तरफ से आए खतरनाक कोरोनल मास इजेक्शन (CME) ने इसकी पूंछ को काट दिया, लेकिन कुछ ही समय बाद यह फिर से बन गई — मानो छिपकली की तरह regeneration हो रहा हो। यह घटना वैज्ञानिकों के लिए एक अनूठा opportunity बन गई है सोलर वातावरण को समझने का।
धूमकेतु की पूंछ तब बनती है जब इसके केंद्र (न्यूक्लियस) से गैस और धूल निकलती है और सूर्य की किरणों या सोलर विंड से interact है। आमतौर पर, पूंछ सूर्य से दूर की दिशा में होती है। लेकिन जब CME आया, तो इसके चुंबकीय प्रभाव ने पूंछ के एक हिस्से को अलग कर डिस्कनेक्शन इवेंट पैदा कर दिया। इसके बाद पूंछ में स्पष्ट gap नजर आने लगा।
लेकिन वैज्ञानिकों ने देखा कि न्यूक्लियस से लगातार निकल रही गैसें और धूल तुरंत नई पूंछ बनाने लगीं। यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) का कहना है कि धूमकेतु अत्यंत dynamic होते हैं और सोलर सिस्टम में घूमते समय लगातार बदलते रहते हैं। हालाँकि, यह जैविक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भौतिक process है। फिर भी, इस तरह का तुरंत पुनर्निर्माण देखकर लगता है मानो पूंछ छिपकली की तरह regrow रही हो।
यह अध्ययन, जिसे 'द फर्स्ट क्वांटिटेटिव स्टडी ऑफ कॉमेटरी टेल रिग्रोथ' कहा गया है, सोलर विंड के व्यवहार को समझने में मदद करेगा। नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के विशेषज्ञों के मुताबिक, पूंछ का टूटना सोलर विंड में disturbance का संकेत है। इस जानकारी से भविष्य में धूमकेतुओं के behavior की भविष्यवाणी करना आसान होगा और हमारे सूर्य के प्रभाव को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।
क्या यह वाकई जैविक पुनर्जनन है या सिर्फ physical process भौतिक प्रक्रिया का दृश्य भ्रम?
अगर पूंछ टूट सकती है, तो क्या यह धूमकेतु के lifespan आयुकाल पर असर डालता है?
छिपकली जैसी तुलना बहुत सटीक है। लेकिन यहाँ तो गैस और धूल का लगातार बहाव है, जैसे कोई टैप खुला हो।
सोलर विंड की impact प्रभाव इतना तेज होता है कि पूंछ काट दे? हैरानी की बात है।
यह अध्ययन सोलर सिस्टम के dynamics गतिशीलता को समझने में बहुत मदद करेगा।
क्या यह घटना अन्य धूमकेतुओं में भी देखी गई है, या Nishimura वाकई इस मामले में unique अनोखा है?